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उल्टे रथ की क्या है महत्त्व, क्यों जाते हैं जगन्नाथ गुंडीचा मंदिर

संघमित्रा सक्सेना

कोलकाता: आज उल्टा रथ पुजा हैं। पूरी के साथ साथ कोलकाता के विभिन्न स्थानों में उल्टा रथ पुजा आनंद के साथ मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार रथयात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के साथ अपने मौसी के घर के लिए रवाना होते है। लगातार 7 दिन मौसी के घर में बिताने के बाद आठवें दिन भगवान जगन्नाथ आपने भाई बहन के साथ वापस अपने घर लौट आते हैं। इस दौरान अटवेश नमक अनुष्ठान की जाती है।
*क्या आप जानते है, क्यों भगवान जगन्नाथ अपने मौसी के घर से वापस आने के बाद तुरंत मंदिर नहीं जाते?*
दरहसल जगन्नाथ जब अपने भाई बहनों के साथ गुंडीचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं, तब वहीं पर एक सप्ताह भगवान जगन्नाथ अपने परिवारजनों के साथ रुकते हैं। भगवान की वापसी को उल्टे रथ और वहुदायात्रा भी कहा जाता हैं। भोजन प्रिय भगवान जगन्नाथ के लिए 56 प्रकार के भोग को तैयार की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। लेकिन उल्टा रथवाले दिन और आनेवाले तीन दिनो तक भगवान जगन्नाथ रथ में ही निवास करते हैं। कहावत है कि यह तीन दिन स्वर्णावेश, आधारपोणा और निलाद्री भोज का आयोजन किया जाता है। आज भी इस परम्परा को मनाया जाता है और उसके बाद ही भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और दाउ बलराम के साथ मूल मंदिर में प्रवेश करते है।

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