Breaking News

नरक चतुर्दशी और हैलोवीन

–संघमित्रा सक्सेना, कोलकाता – पश्चिम बंगाल, इंडिया इनसाइड न्यूज।

नरक चतुर्दशी दिवाली के पहले मनाई जानेवाली विशेष त्योहार हैं। इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। पूर्वी भारत और पश्चिम बंगाल में मनाया जानेवाला पारंपरिक हिंदू त्यौहार हैं। विदेश में इस फेस्टिवल को हैलोवीन कहा जाता हैं।

●नरक चतुर्दशी की महत्व?

पौराणिक मान्यता की अनुसार इस दिन श्रीकृष नरकासुर की वध कर विजय हासिल की थी। इसलिए इसे नरक चतुर्दशी और भूत चतुर्दशी कहा जाता हैं।

●कब मनाया जाता है?

यह त्यौहार दिवाली तथा कालीपूजा के एकदिन पहले मनाया जाता है। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में पारंपरिक तौर तरीके से इसे मनाते है।

●नरक चतुर्दशी और हैलोवीन

भारत में जब नरक चतुर्दशी मनाया जाता है तब लंदन में बड़े ही धूमधाम से हैलोवीन मनाया जाता है। हैलोवीन पार्टी में एक दूसरे से लोग मिलते हैं। सब हैलोवीन कॉस्ट्यूम पहनकर इस फेस्टिवल को सेलिब्रेट करते है। गेस्ट को चॉकलेट और पेस्ट्रीज खिलाया जाता है। हेलोवीन फेस्टिवल, ऑल हैलो ईव तथा ऑल सेंट्स ईव से जाना जाता हैं। विदेश में यह त्यौहार हर साल अक्टूबर को मनाया जाता है।

●हैलोवीन की महत्व

पश्चिमी क्रिश्चियन धर्म के लोग यहां मानते हैं कि नई फसल जब फार्मर, घर पर लाते हैं तब हेलोवीन उत्सव मनाई जाती है। यह अपने आप में एक अनोखी उत्सव है लेकिन इस तत्व के साथ वास्तविक संपर्क की कोई जानकारी नहीं है। अतः त्योहार चाहे कोई भी मनाए, भाषा भले ही अलग हो लेकिन सर सबका एक ही होता है और वह है एक दूसरे के प्रति सद्भावना बरकरार रखना। उत्सव में एक साथ हंसना और तकलीफ में साथ खड़ा होना। तभी सही मायने में बुराई की हार और अच्छाई की जीत होती है। जिसकी शुरुआत भगवान श्री राम किए थे। हमें उनके इस आदर्श को ही आने वाले दिनों में लेकर चलना है।

About editor

Check Also

हावड़ा ग्रामीण में फिर मिला दुर्लभ सफेद करैत सांप, जाल कारखाने से किया गया रेस्क्यू

उलूबेड़िया – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की। हावड़ा ग्रामीण जिले के इलाके से एक बार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *