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बंगाल विधानसभा चुनाव में अपना जलवा दिखाएंगी अखंड भारत पार्टी दावा है मंटू चरण मंडल का
अखंड भारत पार्टी, जिसका रजिस्ट्रेशन 2017 में हुआ है, 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में पूरे पश्चिम बंगाल में 294 सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारेगी, यह बात अखंड भारत पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष मंटू चरण मंडल ने एक संवाददाता बैठक में कही। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कहा कि पश्चिम बंगाल में पिछले 35 सालों से लेफ्ट फ्रंट और करीब 15 सालों से तृणमूल कांग्रेस का राज रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोगों का कोई फायदा नहीं हुआ है। नौकरी मिलने के बावजूद कई नौजवान युवक युवतियों की नौकरी चली गई है। शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, अखंड भारत पार्टी इस बार मैदान में उतरेगी और घर-घर जाकर कैंपेनिंग करके सभी लोगों तक यह मैसेज पहुंचाएगी, ताकि 2026 में उनके उम्मीदवार चुनकर विधानसभा में जाएं।

उनका पहला काम पश्चिम बंगाल के बेरोजगार युवाओं को हर साल दो लाख नौकरियां देना है। वे हर जिले में इंडस्ट्री बनाएंगे और उन्हें नौकरी देंगे ताकि कोई दूसरे राज्य में काम करने न जाए और एक पहचान बनाना है। अब हमे देखना हैं कि पश्चिम बंगाल में कई पार्टियां हैं। वे 2026 में अपने उम्मीदवार उतारेंगे, लेकिन इस बार अखंड भारत पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में देखना है कि वह कितनी मजबूत है और भोटरो को कितना लुभा पाते है।

कौन है मंटु चरण मंडल ?
मंटू चरण मंडल एक एक्टिव पॉलिटिकल एक्टिविस्ट हैं। वे इंदिरा गांधी अमल से कांग्रेस में शामिल हुए और फिर 71 से 76 तक CPIM ट्रेड यूनियन में शामिल हुए और 79 से कई सालों तक उन्होंने नॉर्थ हावड़ा में BJP वर्कर के तौर पर काम किया। उनके मुताबिक, अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों के साथ काम करने के बाद, उन्होंने देखा कि कोई भी पार्टी पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कुछ नहीं कर रही है, इसलिए उन्होंने एक नई पार्टी, अखंड भारत पार्टी बनाई, जो पूरे भारत में है। 2017 में रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद, उन्होंने पिछला लोकसभा चुनाव लड़ने के बारे में सोचा, लेकिन कुछ वजहों से वे चुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतार पाए। इस बार वे 2026 के चुनावों में सीधे लोगों तक पहुंचना चाहते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी तृणमूल कांग्रेस को सपोर्ट किया, तो उन्होंने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी थे, तो उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को भी सपोर्ट किया था लेकिन उन्होंने कभी सीधे तृणमूल कांग्रेस पार्टी नहीं किया है। उनकी नजर में सभी पार्टियों एक जैसी है कोई भी बंगाल की जनता के हितों के लिए काम नहीं कर रही है इसलिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है।

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