कोलकाता – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
राष्ट्रीय चुनाव आयोग की ओर से ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह लोकतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस को दिए जाने के बाद भांगड़ के आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने तीखी नाराजगी जताई है। हालांकि, उनकी ही पार्टी के हावड़ा सदर के पूर्व कन्वेनर इमरान खान ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार नौशाद सिद्दीकी ने वर्ष 2021 में विधानसभा चुनाव और 2023 में पंचायत चुनाव राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। चुनाव जीतकर वह विधायक बने। इसके बावजूद वह सार्वजनिक रूप से हर जगह खुद को आईएसएफ विधायक के रूप में परिचित कराते हैं।
इमरान खान का आरोप है कि वास्तव में नौशाद सिद्दीकी ने राज्य की जनता के साथ धोखा किया है। इसके पीछे कोई बड़ा खेल है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग की टीम ने बड़े कैमरे से नौशाद सिद्दीकी की सभाओं की रिकॉर्डिंग की थी, फिर आयोग ने इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की?
चुनाव आयोग में जमा किए गए उसी हलफनामे में कथित तौर पर यह भी दिखाई देता है कि नौशाद सिद्दीकी ने ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह के लिए चुनाव आयोग के समक्ष आवेदन किया था। चूंकि राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है, इसलिए चुनाव आयोग की ओर से उसे फ्री सिंबल के रूप में ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। अब ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दूसरे दल को दिए जाने के बाद इस मामले को लेकर नौशाद सिद्दीकी के हाई कोर्ट जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, पार्टी की पहचान को लेकर नौशाद सिद्दीकी ने क्या और किस उद्देश्य से जानकारी छिपाई, इस पर सवाल उठाते हुए इमरान खान ने कहा है कि वह चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस मामले को चुनौती देंगे।उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड में 2021 के भांगड़ चुनाव के लिए नौशाद सिद्दीकी का नाम Rashtriya Secular Majlis Party के उम्मीदवार के रूप में दर्ज है। हालिया रिपोर्टों में भी 2021 में ISF उम्मीदवारों के इस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने और ‘लिफाफा’ चिन्ह के इस्तेमाल का उल्लेख है।
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