
कोलकाताः बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस समर्थक पूर्व कुलपतियों और वरिष्ठ प्रोफेसरों के एक समूह ने शुक्रवार को राजभवन के निकट राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति सीवी आनंद बोस के खिलाफ धरना दिया।

साथ ही प्रदर्शन किया। इन शिक्षाविदों का संगठन ‘द एजुकेशनिस्ट फोरम’ राजभवन के उत्तरी गेट के पास धरना दिया। उन्होंने राज्यपाल द्वारा उठाए गए कदम का विरोध किया।

उनकी मांग है कि राज्यपाल को संविधान का पालन करना चाहिए। स्थाई कुलपति की नियुक्ति की जाए। उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा कि कानून के मुताबिक और कुलपति की नियुक्ति होनी चाहिए।

बाद में वे राजभवन के उत्तर गेट पर गए और पुलिस को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने राज्यपाल से यह बताने को कहा कि 10 साल से कम अनुभव वाले प्रोफेसरों को राजभवन द्वारा अंतरिम कुलपति के रूप में कैसे नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल पर अपने कृत्यों से उच्च शिक्षा का गला घोंटने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

शिक्षाविदों के मंच ने बोस को लिखे पत्र में कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राज्यपाल को इस संबंध में अपनी पसंद के व्यक्तियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है।

बंगाल के राज्यपाल के रूप में, आपने नियमित और पूर्णकालिक कुलपतियों की नियुक्ति के लिए खोज-सह-चयन समितियों के गठन के अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए थे और अभी भी आप इस विषय पर विधानसभा द्वारा तीन महीने पहले पारित विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करते हैं। उन्होंने कहा कि आप संभवतः कानून को क्रियान्वित करना और उस पर कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं।

हम आशा करते हैं कि आप हमारे संविधान के प्रावधानों के बारे में अवश्य जानते होंगे। अनुच्छेद 200 में कहा गया है कि राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को अनिश्चितकाल तक नहीं रोक सकते और उन्हें जल्द से जल्द कार्रवाई करनी होगी। इस पत्र पर पूर्व कुलपति ओम प्रकाश मिश्रा के अलावा कई अन्य लोगों ने हस्ताक्षर किए।
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