–कुमार गौरव, मधुबनी – बिहार, बात हिन्दुस्तान की।
घोघरडीहा थाना पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे ठगने वाले एक कथित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 63 मूल पासपोर्ट, एक मोटरसाइकिल, चार मोबाइल फोन और पांच खाली रजिस्ट्री लिफाफे बरामद किए हैं। मामले में मुख्य सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक डाककर्मी के भी शामिल होने की बात सामने आई है।
मधुबनी पुलिस अधीक्षक ने सोमवार को प्रेस वार्ता में बताया कि 6 और 7 सितंबर की मध्यरात्रि करीब 2 बजे घोघरडीहा थाना पुलिस हनुमान चौक के पास रात्रि गश्ती और विशेष वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान शत्रुपट्टी की ओर से आ रहे मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने पुलिस को देखकर अचानक बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मो. इरशाद, निवासी किसनीपट्टी और रफी अहमद, निवासी शत्रुपट्टी, थाना घोघरडीहा के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद काले रंग के बैग से देश के विभिन्न राज्यों और जिलों से जारी 63 मूल पासपोर्ट, पांच खाली रजिस्ट्री लिफाफे और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।
●पूछताछ में सामने आया नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में मो. इरशाद ने बताया कि उसके पिता मो. आरजू द्वारा विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर देश के अलग-अलग हिस्सों से पासपोर्ट मंगवाए जाते थे। इन पासपोर्ट को ग्रामीण डाक सेवक मो. अदनान हुसैन के पते पर मंगाए जाने की बात सामने आई है।
इसके बाद पासपोर्ट को बिहार के पटना, उत्तर प्रदेश के कानपुर तथा पंजाब और महाराष्ट्र के एजेंटों तक पहुंचाने का काम किया जाता था। पुलिस के अनुसार, कानपुर के एजेंटों के नाम मयंक और श्रवण बताए गए हैं।
आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने तत्काल छापेमारी करते हुए कथित मुख्य सरगना मो. आरजू और डाककर्मी मो. अदनान हुसैन को भी उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए।
●2024 से चल रहा था कथित सिंडिकेट
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में मो. आरजू ने बताया कि रूस में रहने के दौरान वह अंतरराष्ट्रीय एजेंटों के संपर्क में आया था। आरोप है कि वर्ष 2024 से डाककर्मी की कथित मिलीभगत से लोगों को विदेश में नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर पासपोर्ट मंगवाए जाते थे।
पुलिस का आरोप है कि प्रत्येक पासपोर्ट के बदले करीब दो लाख रुपये लेकर लोगों को टूरिस्ट वीजा के जरिए अवैध रूप से विदेश भेजा जाता था। इसके अलावा अन्य लोगों के नाम पर कथित फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेज तैयार करने का भी काम किया जाता था।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि विदेश पहुंचने के बाद कुछ लोगों के पासपोर्ट अपने कब्जे में रख लिए जाते थे और उन्हें घरेलू काम, अन्य मजदूरी अथवा कथित तौर पर युद्ध क्षेत्र तक भेजे जाने का खतरा रहता था।
●पटना और कानपुर के एजेंट पुलिस के रडार पर
इस मामले में घोघरडीहा थाना में कांड संख्या 210/26 के तहत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। वहीं, पुलिस गिरोह से जुड़े पटना और कानपुर के एजेंटों की गिरफ्तारी के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई लगातार चलाए जा रहे वाहन जांच और अपराध नियंत्रण अभियान के दौरान हुई, जिसने कथित तौर पर विदेश भेजने के नाम पर संचालित एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। मामले की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
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