हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
●समाजवादी पार्टी का आरोप 2026 विधानसभा चुनाव में वोट लेने के बाद वोटर लिस्ट से कई लोगों का नाम काट दिया गया
चुनाव आयोग की डायरेक्टर जनरल (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी की हावड़ा जिला इकाई ने हावड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी का झंडा लेकर थाने के बाहर नारेबाजी भी की। बाद में सीमा खन्ना के खिलाफ शिकायत सौंपकर कार्यक्रम समाप्त किया गया।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीकांत घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका के कारण भाजपा को अतिरिक्त लाभ मिला है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने सीमा खन्ना की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
श्रीकांत घोष ने कहा कि राज्य में जिन बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को कथित तौर पर फर्जी मतदाता बताया गया था, उनकी पहचान को लेकर चुनाव आयोग से पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की जानी चाहिए। उन्होंने पुराने बैलेट बॉक्स के जरिए मतदान कराने की मांग भी रखी।
उन्होंने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने की शिकायत सामने आ रही है। चूंकि आने वाले समय में हावड़ा नगर निगम का चुनाव होना है, इसलिए जिन लोगों के नाम अब तक मतदाता सूची में नहीं जुड़े हैं, उनके मामले में तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद एक महिला ने दावा किया कि उनकी बहन ने 2026 के विधानसभा चुनाव में मतदान किया था। एसआईआर की सुनवाई में भी वह मौजूद हुई थीं, लेकिन मतदान के बाद उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया। महिला ने आरोप लगाया कि मुस्लिम होने के कारण नाम हटाए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं या नहीं, इसकी समय समय पर जांच कर लें।
वहीं, हावड़ा जिला भाजपा नेता ओम प्रकाश सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि भाजपा को इस तरह की प्रक्रिया से सत्ता में आना होता तो वह पहले भी ऐसा कर सकती थी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं, वे चुनाव आयोग और जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराएं।
ओम प्रकाश सिंह ने हावड़ा के जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि शिकायतें गलत पाई जाती हैं तो शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो चुनाव आयोग की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया की जानी चाहिए।
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