उलूबेड़िया – हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
आज विजयादशमी है। मां उमा कैलाश के लिए विदा हो चुकी हैं। दुर्गोत्सव के समापन के साथ ही चारों ओर उदासी का माहौल छा गया है। दोपहर के बाद से ही विभिन्न पूजा मंडपों में मां दुर्गा के विसर्जन से पहले सिंदूरदान और देवी वरण की रस्म शुरू हो गई। विजयादशमी के दिन घरों की प्रतिमाओं से लेकर सार्वजनिक पूजा मंडपों की प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया जाएगा।
उलूबेड़िया में भी घरों और सार्वजनिक पूजा मंडपों की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है। हालांकि, अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन आगामी शुक्रवार को होगा। प्रतिमा विसर्जन को लेकर प्रशासन की ओर से उलूबेड़िया पुराने अस्पताल मैदान के घाट और उलूबेड़िया कालीबाड़ी घाट पर विशेष व्यवस्था की गई है।
इस दिन जिन पूजा समितियों की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है, उनमें उलूबेड़िया आशा भवन सेंटर की दुर्गा प्रतिमा भी शामिल है। विशेष रूप से सक्षम बच्चों द्वारा संचालित इस पूजा की खास आकर्षण फ्रांस से आईं दो युवतियां रहीं।
●दुर्गा पूजा की हर गतिविधि में लिया हिस्सा
फ्रांस से आईं इन दोनों युवतियों ने पूजा मंडप की सजावट से लेकर प्रतिमा लाने तक, पुष्पांजलि अर्पित करने से लेकर सभी के साथ बैठकर सामूहिक भोज करने तक हर गतिविधि में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इतना ही नहीं, प्रतिमा विसर्जन के दौरान उन्होंने सभी के साथ सिंदूर खेला और धुनुची नृत्य में भी भाग लिया।
हालांकि, विजयादशमी के दिन उनके चेहरे पर आश्चर्य और उत्सुकता के भाव साफ दिखाई दे रहे थे। बातचीत के दौरान दोनों युवतियों ने बताया कि फ्रांस में रहते हुए उन्होंने बंगाल की दुर्गा पूजा की भव्यता और उत्साह के बारे में सुना था। लेकिन यहां आकर उन्होंने जिस तरह का उत्साह और उल्लास अपनी आंखों से देखा, वह उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है।
●पढ़ाई के लिए आईं, दुर्गा पूजा से जुड़ गया दिल
आशा भवन सेंटर के निदेशक जॉन मैरी बारुई ने बताया कि दोनों युवतियां लगभग एक महीने पहले पढ़ाई के सिलसिले में यहां आई थीं। यहां आने के बाद जब उन्होंने दुर्गा पूजा की तैयारियां देखीं, तो उन्होंने भी पूजा के आयोजन में सहयोग करने का निर्णय लिया।
इसके बाद से ही वे सभी के साथ मिलकर पूजा की तैयारियों में जुट गईं और हर गतिविधि में सक्रिय रूप से भाग लिया। विजयादशमी के दिन प्रतिमा विसर्जन के दौरान भी उन्होंने अन्य सदस्यों के साथ समान उत्साह से हिस्सा लिया।
इस तरह उलूबेड़िया की दुर्गा पूजा ने न केवल विशेष रूप से सक्षम बच्चों की प्रतिभा और सहभागिता को सामने लाया, बल्कि फ्रांस से आईं दो युवतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और उत्सव की भावना को भी एक खूबसूरत रूप में प्रस्तुत किया।
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