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मोहभंग : नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र बोस ने छोड़ी भाजपा

 

कोलकाता : आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बुधवार को भाजपा से इस्तीफा दे दिया। पिछले कुछ समय से उन्हें विभिन्न मुद्दों पर भाजपा की नीतियों व पार्टी राज्य नेतृत्व की आलोचना करते देखा जा रहा था।

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजे अपने त्यागपत्र में बोस ने लिखा कि अब पार्टी में रहना मेरे लिए असंभव हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके उत्साही प्रयासों के बावजूद उन्हें बोस भाइयों- सुभाष चंद्र बोस और शरत चंद्र बोस की विचारधारा का प्रचार करने के लिए भाजपा से केंद्रीय या राज्य स्तर पर कोई समर्थन नहीं मिला, जिसका वादा किया गया था।

चंद्र बोस 2016 में भाजपा में शामिल हुए थे और उन्होंने दो बार पार्टी के टिकट पर यहां 2016 का विधानसभा और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा था। 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

 

पार्टी में शामिल होने के बाद चंद्र बोस, जिन्हें 2016 में बंगाल भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, को 2020 के संगठनात्मक फेरबदल के दौरान पद से हटा दिया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी हार के बाद से बोस पार्टी से निष्क्रिय थे।

 

अपने इस्तीफे में बोस ने कहा- जब मैं भाजपा में शामिल हुआ था तो मुझसे वादा किया गया था कि मुझे नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शरत चंद्र बोस की समावेशी विचारधारा का प्रचार करने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

 

उन्होंने कहा कि मेरी शुभकामनाएं पार्टी के साथ है, लेकिन उन्हें सभी समुदायों को एकजुट करना चाहिए। हालांकि 2016 में पार्टी में शामिल होने की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए बोस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व व विकास कार्यक्रम की सराहना की।

 

उन्होंने लिखा- तब मेरी चर्चा बोस ब्रदर्स की समावेशी विचारधारा पर केंद्रित थी। तब और बाद में मेरी समझ यह रही है कि मैं इस विचारधारा को भाजपा के मंच से पूरे देश में प्रचारित करूंगा। इसके अलावा एक आजाद हिंद मोर्चा बनाने का भी निर्णय लिया गया था।

 

उन्होंने आगे कहा कि बंगाल की रणनीति के बारे में उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश भाजपा को काफी प्रस्ताव व सुझाव दिए, लेकिन ये कभी क्रियान्वयन नहीं हुआ। मेरे प्रस्तावों को नजरअंदाज कर दिया गया। इन दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए मेरे लिए भाजपा के सदस्य के रूप में बने रहना असंभव हो गया है।

 

बता दें कि 2019 में पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर बोस ने सीएए का भी विरोध किया था। वहीं, इस्तीफे से पहले उन्होंने इंडिया बनाम भारत के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। राष्ट्रपति द्वारा जारी जी20 के लिए निमंत्रण पत्र में इंडिया को भारत किए जाने पर बोस ने कहा कि इसका नाम बदलने की जरूरत नहीं थी। सरकार को दूसरे अहम मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

 

पार्टी के संपर्क में नहीं थे बोस : भाजपा

– इधर, उनके इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि काफी लंबे समय से वह पार्टी के संपर्क में नहीं थे।

 

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