हावड़ा – पश्चिम बंगाल
रविवार सुबह हावड़ा के बेलूड़ में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। श्रमिकों और प्रबंधन के बीच तीखे मतभेद के चलते बेलूड़ का ऐतिहासिक अंबिका जूट मिल अचानक बंद हो गया। इसके परिणामस्वरूप एक झटके में लगभग 4,000 से 5,000 श्रमिक और उनके परिवार आजीविका के संकट में पड़ गए।
अन्य जूट मिलों में जहां एक श्रमिक को 6 लूम मशीनें चलानी होती हैं, वहीं श्रमिकों का आरोप है कि इस मिल में लंबे समय से अधिकांश श्रमिकों को 8 मशीनें चलाने के लिए मजबूर किया जा रहा था। इसे लेकर श्रमिकों में काफी समय से नाराज़गी थी। रविवार सुबह सभी विभागों में प्रति श्रमिक 8 मशीनें चलाने का निर्देश जारी होते ही विरोध तेज हो गया।
श्रमिकों की मांग थी कि आगामी 9 तारीख को बीएमएस (BMS) यूनियन के नेतृत्व की मौजूदगी में बातचीत कर समस्या का समाधान निकाला जाए। लेकिन प्रबंधन द्वारा इस मांग को स्वीकार नहीं किए जाने पर श्रमिकों ने काम बंद कर दिया।
बताया जा रहा है कि तत्कालीन सरकार के समय त्रिपक्षीय बैठक के बाद प्रति श्रमिक 8 मशीनें चलाने का निर्णय लिया गया था और उसी व्यवस्था के तहत मिल का संचालन हो रहा था। हालांकि श्रमिकों का कहना है कि राज्य में सरकार बदलने के बाद से इस मुद्दे को लेकर विवाद और बढ़ गया है।
मिल प्रबंधन का दावा है कि स्थानीय भाजपा के कुछ नेताओं ने भी विवाद सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इस संबंध में संबंधित नेता से संपर्क करने पर उन्होंने बाद में बात करने की बात कहकर फोन काट दिया। वहीं, बीएमएस नेता तथा राज्य के मंत्री से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
फिलहाल बेलूड़ का अंबिका जूट मिल बंद है। एक ओर रोज़गार का संकट और दूसरी ओर नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच हजारों श्रमिक और उनके परिवार इस इंतज़ार में हैं कि आखिर यह गतिरोध कब समाप्त होगा और मिल दोबारा कब शुरू होगा।
Baat Hindustan Ki Online News Portal