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पूर्व रेलवे के भगवानगोला स्टेशन पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली का शुभारंभ, रेल परिचालन होगा अधिक सुरक्षित एवं तेज़

कोलकाता – पश्चिम बंगाल

सुरक्षा एवं परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्व रेलवे ने सियालदह मंडल के भगवानगोला स्टेशन पर रेट्रोफिटेड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू किया है। यह परियोजना 5 जुलाई, 2026 को सुबह 11:59 बजे सफलतापूर्वक चालू की गई। यह महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक उन्नयन पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के गतिशील नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिनके मार्गदर्शन में रेलवे क्षेत्र में तीव्र तकनीकी आधुनिकीकरण तथा सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा रहा है।

इस इंजीनियरिंग उपलब्धि का कार्य सियालदह मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री राजीव सक्सेना के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। परियोजना की प्रमुख विशेषता इसकी रेट्रोफिटिंग प्रकृति रही, जिसके अंतर्गत पुराने जीई (GE) निर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम को अत्याधुनिक सीमेंस (एमके-II) निर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में निर्बाध रूप से परिवर्तित किया गया। यह संपूर्ण कार्य मौजूदा संरचना के भीतर ही संपन्न किया गया, जिससे नियमित रेल परिचालन पर अत्यंत न्यूनतम प्रभाव पड़ा। उन्नयन के दौरान सभी मौजूदा फील्ड उपकरण – जैसे सिग्नल, प्वाइंट, ट्रैक सर्किट, लोकेशन बॉक्स तथा केबल नेटवर्क – को यथावत रखा गया। इन्हें निरंतरता, इंसुलेशन तथा कोर सत्यापन सहित सभी आवश्यक तकनीकी मानकों पर सावधानीपूर्वक परीक्षण के बाद नई सीमेंस प्रणाली से पूर्णतः एकीकृत किया गया।

सिग्नल एवं दूरसंचार कार्यों के अंतर्गत इस परियोजना में समपार फाटक संख्या 165 को भी औपचारिक रूप से बंद किया गया। इसके अनुरूप मौजूदा डाउन गेट स्टॉप सिग्नल तथा गेट डिस्टेंट सिग्नल को हटाकर एक नया डाउन डिस्टेंट सिग्नल स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त डेटा तैयारी, सर्किट संशोधन, लॉजिक कॉन्फ़िगरेशन, इनडोर वायरिंग में परिवर्तन, टर्मिनेशन तथा फील्ड सर्किट के साथ इंटरफेसिंग सहित अनेक महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किए गए।

उन्नत प्रणाली के माध्यम से मेन सिग्नल संख्या 6 तथा डमी सिग्नल संख्या 1 को सफलतापूर्वक चालू किया गया। परियोजना के अंतर्गत कुल 14 रूटों का व्यापक परीक्षण एवं सत्यापन किया गया, जबकि 6 प्वाइंट मशीनों द्वारा संचालित 3 प्वाइंटों को पूरी तरह प्रमाणित किया गया। सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए एफ्ट्रॉनिक्स निर्मित आधुनिक डेटा लॉगर तथा नोटोफायर निर्मित अत्याधुनिक अग्नि चेतावनी (फायर अलार्म) प्रणाली भी स्थापित की गई। सभी मेन, शंट तथा कॉलिंग-ऑन सिग्नलों का निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप परीक्षण किया गया। अंतिम रूप से प्रणाली को परिचालन विभाग को सौंपने से पूर्व विस्तृत सिमुलेशन, पत्राचार परीक्षण, फेल-सेफ परीक्षण तथा परिचालन विभाग के साथ संयुक्त परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए गए, जिससे प्रणाली की विश्वसनीयता एवं निर्बाध कार्यक्षमता सुनिश्चित हो सके।

इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझि ने कहा, “भगवानगोला स्टेशन पर स्थापित आधुनिक सीमेंस (एमके-II) इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली अद्यतन फेल-सेफ लॉजिक के माध्यम से रेल सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाती है तथा परिचालन में अधिक लचीलापन प्रदान करती है। यह निर्बाध रेट्रोफिटिंग यात्रियों को न्यूनतम असुविधा पहुँचाते हुए अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध कराती है और दीर्घकाल में अनुरक्षण (मेंटेनेंस) की आवश्यकता एवं लागत में भी उल्लेखनीय कमी लाएगी।”

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