–संघमित्रा सक्सेना – कोलकाता – पश्चिम बंगाल।
शनिवार, 18 जुलाई भारत में अपना पहला प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 उत्क्षेपण हुआ। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से विक्रम-1 को उत्क्षेपण किया गया। जानकारी के मुताबिक स्काई रूट एयरोस्पेस ने विक्रम -1 स्मॉल लिफ्ट लॉन्च व्हीकल का निर्माण किया। इस प्रोजेक्ट का नाम आगमन हैं। यह प्रोजेक्ट 2018 में शुरू हुई थी।
●विक्रम – 1 की खासियत
•इसकी ऊंचाई 24 मीटर यानी 79 फीट हैं
•डायमीटर 1.7 मीटर
•यह रॉकेट 4 स्टेज में डिवाइडेड है
•इसका मास 260केजी है
•रॉकेट का शुरुवाती हिस्सा नीले रंग की हैं, बाकी हिस्सा सफेद रंग और इंडियन फ्लैग से सजी हैं
•इस रॉकेट में 3D प्रिंटेड लिक्विड इंजन का इस्तेमाल हुआ है
●इंडियन स्पेस प्रोग्राम क्या हैं?
दरअसल इंडियन स्पेस प्रोग्राम के माध्यम से भारतीय वैज्ञानिकों को स्पेस साइंस के लिए, तैयार किया जाता है। जानकारी के अनुसार भारत के स्पेस साइंटिस्ट सफलतापूर्वक फॉरेन स्पेस और सैटेलाइट वॉच कंपनी में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर रही है। प्रोजेक्ट आगमन ऐसे ही भारतीय वैज्ञानिकों का मेहनत और टैलेंट का नाम हैं। विश्व में इसकी काफी प्रशंसा हो रही है। बता दे कि आगमन भारत के “मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट” की सफल उदाहरण है।
●अब तक भारत ने कितने स्वदेशी रॉकेट लांच की है?
•पोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल
•जिओश्रींकवनस सैटेलाइट लॉन्च
•लॉन्च व्हीकल मार्क- 3
•स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल
•विक्रम – S
•विक्रम – 1
यह दोनों ही स्काई रूट एयरोस्पेस द्वारा निर्मित है। रेउसाबल लॉन्च व्हीकल टेक्निकल डेमोंस्ट्रेटर आदि।
प्रवीर सान्याल (पूर्व ब्रिगेडियर इंडियन आर्मी) ने कहा कि इस पूरी विषय पर खर्च अनुमानिक 145 मिलियन डॉलर्स की हुई है। जिसमें भारतीय इन्वेस्टर्स ने लगभग 15 मिलियन का योगदान दिया है।
विक्रम-1 तथा मिशन ‘आगमन’ का सफलता देख यह आशा किया जाता है कि “आने वाले समय में फॉरेन स्पेस इन्वेस्टर्स, भारत के स्पेस वेंचर प्रोजेक्ट में भारी मात्रा में निवेश करेगी। यह भारत के लिए सुखद साबित होगा। जहां स्पेस साइंस से जुड़ी भारतीय टेक्नोलॉजी विश्व दरबार में अलग दर्जा पाने की शुरुआत कर चुकी हैं।”
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