हावड़ा – पश्चिम बंगाल।
स्वास्थ्य भवन के निर्देश पर हावड़ा के एक निजी ब्लड बैंक में जिला स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी की। आरोप है कि विभिन्न रक्तदान शिविरों से एकत्र किए गए बड़ी मात्रा में रक्त को अवैध रूप से दूसरे राज्यों में भेजा गया। प्रारंभिक जांच में लगभग 10 हजार यूनिट रक्त और प्लाज़्मा की अनियमित तरीके से तस्करी किए जाने का आरोप सामने आया है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस ब्लड बैंक के खिलाफ लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि रक्तदान शिविरों से एकत्र किए गए रक्त का सही हिसाब नहीं रखा गया और निर्धारित नियमों का पालन किए बिना उसे अन्य राज्यों में भेजा गया।
स्वास्थ्य भवन के निर्देश के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने ब्लड बैंक पहुंचकर दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर तथा रक्त संग्रह और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सभी दस्तावेजों की गहन जांच कर तथ्यों का सत्यापन किया जाएगा। यदि अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की जांच जारी है।
●हावड़ा ब्लड बैंक मामले में मंत्री उमेश राय का तृणमूल पर बड़ा हमला, बोले– “रक्त माफिया और मेडिकल माफिया को बख्शा नहीं जाएगा”
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री उमेश राय ने हावड़ा के एक थैलेसीमिया अस्पताल और ब्लड बैंक में सामने आए कथित रक्त एवं प्लाज्मा बिक्री मामले को लेकर पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल शासन के दौरान भ्रष्टाचार समाज के लगभग हर क्षेत्र में फैला हुआ था और अब स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े गंभीर अनियमितताओं के मामले भी सामने आ रहे हैं।
उमेश राय ने कहा कि गरीबों के राशन, विभिन्न सरकारी योजनाओं, गौ तस्करी और कोयला तस्करी जैसे मामलों के बाद अब रक्त और प्लाज्मा की कथित अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान हावड़ा के थैलेसीमिया अस्पताल से ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनसे बड़ी मात्रा में रक्त की चोरी और उसकी बिक्री तथा प्लाज्मा को अन्य राज्यों में भेजे जाने के संकेत मिले हैं।
मंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं और सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी यदि इस तरह की घटनाएं हुई हैं, तो उनकी भी जांच कर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
उमेश राय ने दावा किया कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार नहीं आती तो इस तरह का मामला कभी सामने नहीं आता और रक्तदान करने वाले लोगों को यह भी पता नहीं चल पाता कि उनके द्वारा दान किया गया रक्त कथित रूप से बेचा जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में “रक्त माफिया” और “मेडिकल माफिया” सक्रिय थे, जिन्होंने लोगों की भावनाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था का दुरुपयोग कर अवैध कमाई की।
मामले की जांच जारी है और स्वास्थ्य विभाग ने दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

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