हावड़ा – पश्चिम बंगाल।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम के अंत में ‘एंड सन्स’ लिखना वर्षों से एक परंपरा रही है। इसी परंपरा को तोड़ते हुए हावड़ा की एक मिठाई की दुकान ने नई मिसाल पेश की है। नेताजी सुभाष रोड स्थित इस प्रतिष्ठान का नाम ‘घोषाल एंड डॉटर’ है। यह सिर्फ एक अलग नाम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, समान अधिकार और उत्तराधिकार को लेकर एक सकारात्मक सोच का प्रतीक भी है।
इस मिठाई की दुकान की स्थापना वर्ष 2018 में दूरदर्शन की पूर्व उद्घोषिका और एंकर डॉ. सुतपा घोषाल ने की थी। विज्ञान विषय से स्नातक करने के बाद उन्होंने रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय से नाटक विषय में स्नातकोत्तर और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। लंबे समय तक कला और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े रहने के बाद उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए मिठाई के व्यवसाय में कदम रखा। व्यवसाय शुरू करने से पहले उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय से फूड प्रोसेसिंग का अध्ययन किया तथा पश्चिम बंगाल सरकार के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर व्यावहारिक अनुभव भी हासिल किया।
डॉ. सुतपा घोषाल का कहना है कि मिठाई केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति, परंपरा और भावनाओं का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए उच्च गुणवत्ता, स्वच्छता और स्वाद के साथ लोगों तक मिठाइयाँ पहुँचाना ही उनका मुख्य उद्देश्य है। गुणवत्ता के साथ कभी समझौता न करना उनके संस्थान की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता है।
हालाँकि, इस पहल की सबसे खास बात इसका नाम है। डॉ. घोषाल ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर ‘एंड सन्स’ की जगह ‘एंड डॉटर’ नाम चुना। उनका मानना है कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता। एक बेटी भी समान दक्षता के साथ पारिवारिक व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाल सकती है और उसकी उत्तराधिकारी बन सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका कोई पुत्र नहीं है। यदि पुत्र भी होता तो शायद दुकान का नाम ‘एंड सन्स एंड डॉटर्स’ रखा जाता। लेकिन उनकी केवल एक बेटी है, इसलिए उन्होंने ‘घोषाल एंड डॉटर’ नाम को ही चुना। भविष्य में वह इस व्यवसाय की पूरी जिम्मेदारी अपनी बेटी को सौंपना चाहती हैं।
डॉ. सुतपा घोषाल ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ‘घोषाल एंड डॉटर’ केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में भी अपनी पहचान बनाएगा। साथ ही, इस पहल के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना भी उनका प्रमुख लक्ष्य है। उनका कहना है कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी लोगों का विश्वास और भरोसा होता है, और उसी विश्वास को बनाए रखना उनका सबसे बड़ा संकल्प है।
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