हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
●लाखों रुपये के जोड़ाफूल वाले झंडे तैयार कर रखे थे, चुनाव आयोग के फैसले के बाद मांग घटने का दावा
तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग के हालिया फैसले के बाद इसका असर हावड़ा के झंडा कारीगरों के कारोबार पर भी पड़ने की बात सामने आई है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और ‘फूल एवं घास’ चुनाव चिन्ह को आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम रूप से फ्रीज किया है। इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
हावड़ा के एक झंडा कारीगर राजू के मुताबिक, अब तक तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह के रूप में जोड़ाफूल वाले झंडों की काफी मांग रहती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बड़ी संख्या में जोड़ाफूल वाले छोटे बड़े सभी तरह के झंडे तैयार कर रखे थे। उनका दावा है कि करीब एक लाख से अधिक झंडे तैयार थे, जिन्हें आने वाले चुनाव में इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद थी।
राजू का कहना है कि चुनाव चिन्ह में बदलाव के बाद तैयार किए गए इन झंडों की मांग अचानक कम हो गई है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में तैयार झंडे अब इस्तेमाल के इंतजार में पड़े हैं और इससे झंडा कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि झंडा बनाने वाले कारीगर चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतीकों और झंडों की मांग के आधार पर पहले से तैयारी करते हैं। ऐसे में चुनाव चिन्ह में अचानक बदलाव होने से पहले से तैयार सामग्री का इस्तेमाल कर पाना सम्भव नहीं होता है।
चुनाव आयोग के फैसले के तहत आगामी उपचुनावों के लिए ममता बनर्जी के गुट को ‘फुटबॉल ’ और दूसरे गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम है और मूल पार्टी के नाम एवं प्रतीक को लेकर अंतिम निर्णय बाद में होना है।
ऐसे में हावड़ा के झंडा कारीगर अब नए चुनाव चिन्ह की मांग के आधार पर अपने कारोबार में बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही व्यापार में हुए नुकसान को लेकर भी उनकी मुश्किलें काफी गहरी।
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