कोलकाता – पश्चिम बंगाल।
पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर महाराज के 84वें प्रकट्य दिवस को राष्ट्रोत्कर्ष दिवस के रूप में पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा और हुगली सहित देश-विदेश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महाराज के दीर्घायु एवं विश्व कल्याण की कामना के लिए रुद्राभिषेक, चंडी पाठ, महामृत्युंजय जाप, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा, सत्संग एवं संगोष्ठियों का आयोजन किया गया।
कोलकाता के सत्संग भवन में आयोजित मुख्य समारोह में धर्माचार्यों, विद्वानों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु वंदना तथा अभिनेत्री लक्ष्मी रूपा बनर्जी और अभिनेता अभिक बनर्जी द्वारा मां काली की वंदना एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई।
सभा को संबोधित करते हुए कोलकाता हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं विश्व ब्राह्मण भूषण से सम्मानित प्रेमचंद्र झा ने जगद्गुरु शंकराचार्य के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महाराज का जन्म मिथिला की पावन भूमि, वर्तमान मधुबनी जिले के ढंगा हरिपुर (बक्शी टोल) में हुआ। बाल्यकाल से ही उनमें असाधारण आध्यात्मिक चेतना दिखाई दी। शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज से संन्यास दीक्षा ग्रहण की और वर्ष 1992 में गोवर्धन मठ के तत्कालीन शंकराचार्य द्वारा उन्हें 145वें शंकराचार्य के रूप में पीठासीन किया गया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के अयोध्या में विराजमान होने तथा रामसेतु संरक्षण जैसे विषयों में भी जगद्गुरु शंकराचार्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सनातन धर्म, विश्व शांति, मानव कल्याण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए वे वर्ष में 250 से अधिक दिन भारत और नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों का प्रवास करते हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि जगद्गुरु शंकराचार्य अब तक 200 से अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके हैं, जिनमें 22 से अधिक ग्रंथ वैदिक गणित पर आधारित हैं। वैदिक गणित के क्षेत्र में उन्हें विश्व के प्रमुख विद्वानों में माना जाता है। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय वैदिक ज्ञान, धर्म और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया है।
प्रख्यात संस्कृत विद्वान डॉ. रवींद्रनाथ भट्टाचार्य ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य का ज्ञान और शास्त्रों पर उनकी पकड़ विश्वभर में सम्मानित है। वहीं आचार्य श्रीकांत शास्त्री ने कहा कि उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का पूर्ण वर्णन करना संभव नहीं है। प्रो. डॉ. देवाशीष चौधरी ने वैदिक परंपरा और गुरुकुल शिक्षा की महत्ता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर धर्म भूषण पंडित लक्ष्मीकांत तिवारी, डॉ. अशोक पोद्दार, साहित्यकार नवीन चौधरी, पुरुषोत्तम तिवारी, आकाश शर्मा, डॉ. गोपाल खत्री सहित अनेक विद्वानों और गणमान्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सत्संग भवन के ट्रस्टी दीपक मिश्रा सहित मुकेश शर्मा, शंकर लाल सोमानी, संजय संगारिया, धनंजय ठाकुर, विकास पाठक, निलेश झा तथा अन्य अनेक कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन प्रकाश किला ने किया।
धार्मिक श्रद्धा, वैदिक परंपरा और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही तथा सभी ने जगद्गुरु शंकराचार्य के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और विश्व कल्याण की कामना की।
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