मुर्शिदाबाद/गंजाम – पश्चिम बंगाल/ओडिशा।
कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें लोग ईश्वर की लीला मानने लगते हैं। ओडिशा के गंजाम जिले की रहने वाली लगभग 80 वर्षीय बेला बेहरा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
करीब 10 वर्ष पहले रथ यात्रा के दौरान वह भगवान जगन्नाथ की पूजा के लिए फूल खरीदने घर से निकली थीं, लेकिन रास्ता भटक गईं और फिर अपने घर वापस नहीं लौट सकीं। फूल बेचकर उन्होंने अपने तीनों बेटों का पालन-पोषण किया था, जो आज सफल व्यवसायी हैं। सबसे छोटे बेटे केशव के साथ वह अपने पोते-पोतियों के बीच रहती थीं।
मां के लापता होने के बाद परिवार ने पिछले 10 वर्षों से रथ यात्रा के दौरान पुरी जाना ही छोड़ दिया। बचपन से मां के साथ रथ यात्रा में जाने वाले बेटे के मन में हमेशा एक ही प्रार्थना थी—”हे प्रभु जगन्नाथ, मेरी मां को मुझे लौटा दीजिए। फिर हम मां के साथ ही आपके दर्शन करने आएंगे।”
उधर, वर्षों पहले पुलिस ने वृद्धा को भटकते हुए बरामद किया था। अदालत के आदेश पर उन्हें पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज स्थित तोकिया सीनियर सिटिजन होम (केंद्रीय सरकार संचालित वृद्धाश्रम) में रखा गया। उनकी पहचान जानने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। बेला बेहरा केवल ओड़िया भाषा जानती थीं, जिससे उनकी पहचान और घर तक पहुंचने में और भी कठिनाई हुई।
हाल ही में बहारामपुर अदालत ने निर्देश दिया कि वृद्धा को जल्द से जल्द उनके परिवार तक पहुंचाया जाए। इसके बाद तोकिया सीनियर सिटिजन होम की अधीक्षक अर्पिता लाहिड़ी ने वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब (हैम रेडियो) से सहायता मांगी।
हैम रेडियो के सदस्यों ने अथक प्रयास के बाद ओडिशा के गंजाम जिले में बेला बेहरा के परिवार का पता लगा लिया। जब वीडियो कॉल के जरिए बेटे ने अपनी मां को देखा, तो वह फूट-फूटकर रो पड़ा। भावुक होकर उसने कहा, “यह भगवान जगन्नाथ की ही कृपा है। प्रभु ने आप लोगों को हमारे लिए दूत बनाकर भेजा है।”
संयोग से वृद्धा की मां का लगभग 10 दिन पहले निधन हो चुका है। परिवार के अनुसार, अंतिम समय तक वह अपनी बेटी को याद करती रहीं और भगवान से उसके लौट आने की प्रार्थना करती रहीं।
अब ओडिशा से उनका छोटा बेटा मुर्शिदाबाद पहुंचकर अपनी मां को वृद्धाश्रम से घर ले जाएगा। इसके बाद पूरा परिवार एक बार फिर रथ यात्रा में मां के साथ भगवान जगन्नाथ के दर्शन करेगा।
यह कहानी केवल बिछड़ने और मिलने की नहीं, बल्कि उम्मीद, परिवार और आस्था की भी है। शायद सच ही कहा जाता है—जब प्रभु चाहें, तो बिछड़े हुए भी मिल जाते हैं।
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