हावड़ा – पश्चिम बंगाल।
शहर को स्वच्छ और खुले में शौच एवं पेशाब से मुक्त रखने के उद्देश्य से सरकार की ओर से हावड़ा जिले में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर जगह-जगह सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। लेकिन इन दिनों कई जगहों पर इन शौचालयों की स्थिति सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
हावड़ा के कई इलाके में बना सार्वजनिक शौचालय पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है और उसके मुख्य द्वार पर ताला लगा हुआ है। शौचालय बंद होने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, शौचालय के आसपास ही खुले में पेशाब किए जाने की शिकायत सामने आ रही है, जिससे इलाके में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस उद्देश्य से सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था, उसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, शौचालय के आसपास कुछ कारोबारी दूध के कनस्तर रखकर अपना कारोबार करते नजर आ रहे हैं। इससे सार्वजनिक सुविधा की जगह का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जब सरकार स्वच्छता को लेकर लगातार अभियान चला रही है और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने पर जोर दिया जा रहा है, तो फिर लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए शौचालयों पर ताला क्यों लगा है? स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द शौचालय को खुलवाने और परिसर को अतिक्रमण व व्यावसायिक इस्तेमाल से मुक्त कराने की मांग की है।
गौरतलब है कि 1 सितंबर से राज्य में खुले में शौच और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक से जुड़े नए नियम लागू किए जाने की बात कही गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल जुर्माना लगाने का भी प्रावधान बताया गया है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि नियम लागू होने से पहले ही यदि सार्वजनिक शौचालय बंद पड़े रहें, तो स्वच्छता व्यवस्था को धरातल पर कैसे प्रभावी बनाया जाएगा?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब कार्रवाई करता है और बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को आम लोगों के लिए दोबारा कब खोला जाता है।
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