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वृद्धाश्रम की माताओं के हाथों होगा ‘रानी मां’ का उद्घाटन, आईनों से सजे पंडाल में अंतर्मन की देवी को खोजने का संदेश देगा डॉल्फिन क्लब

हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।

मां काली की आराधना में इस बार माताएं ही मुख्य अतिथि होंगी। जिन माताओं ने अपने जीवन का अधिकांश समय बच्चों और परिवार की देखभाल में समर्पित कर दिया, उन्हीं वृद्धाश्रम की बुजुर्ग महिलाओं के हाथों इस बार देवी के स्वरूप का अनावरण किया जाएगा। मातृशक्ति के प्रति सम्मान और इंसान के भीतर छिपी दिव्यता की तलाश, इन दोनों विचारों को एक सूत्र में पिरोकर मध्य हावड़ा का डॉल्फिन क्लब अपनी 41वीं वर्षगांठ पर काली पूजा को एक विशेष रूप देने जा रहा है।

इस वर्ष क्लब की पूजा का थीम ‘अंतर दर्शन’ है। इसके माध्यम से पंडाल में लगे आईनों के जरिए लोगों को सिर्फ अपना चेहरा देखने के बजाय अपने भीतर की देवी को तलाशने का संदेश दिया जाएगा।

आयोजकों की सोच है कि देवी केवल मंदिरों या प्रतिमाओं तक सीमित नहीं हैं। मातृस्नेह, मानवीय संवेदना, प्रेम और इंसान के भीतर मौजूद सद्भाव में भी उनका वास है। इसी विचार को कलात्मक रूप देने के लिए पूरे पंडाल में छोटे-छोटे आईने, घंटियां और मंगलकारी धागों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही आकर्षक रोशनी की विशेष व्यवस्था भी की गई है।

पंडाल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को चारों ओर लगे आईनों में अपनी ही छवि बार-बार दिखाई देगी। यह प्रतिबिंब मानो उनसे एक सवाल करेगा कि देवी की तलाश में हम कितनी दूर तक चले जाते हैं, लेकिन क्या कभी अपने भीतर झांककर उन्हें खोजने की कोशिश करते हैं?

आध्यात्मिक विचार के साथ इस बार पूजा में मानवीय संवेदना को भी विशेष महत्व दिया गया है। आगामी 6 नवंबर, शुक्रवार की शाम प्राडो वेलफेयर फाउंडेशन के वृद्धाश्रम में रहने वाली बुजुर्ग माताओं के हाथों ‘रानी मां’ की पूजा का उद्घाटन होगा। आमतौर पर फिल्मी सितारों और चर्चित हस्तियों के हाथों पूजा उद्घाटन की परंपरा से अलग हटकर बुजुर्ग माताओं को सम्मान देने की यह पहल आयोजकों के लिए विशेष महत्व रखती है। उनका मानना है कि जिस मातृशक्ति की आराधना में काली पूजा मनाई जाती है, उस मातृशक्ति का वास्तविक जीवन में भी सम्मान होना चाहिए।

नई सोच के साथ क्लब ने अपनी चार दशक पुरानी परंपरा को भी बरकरार रखा है। इस वर्ष भी कुम्हारटोली के प्रसिद्ध मूर्तिकार और काली साधक माधव पाल के हाथों डॉल्फिन क्लब की आराध्या ‘रानी मां’ की प्रतिमा तैयार की गई है।

गत 1 नवंबर को परंपरा के अनुसार मां की आगमनी शोभायात्रा निकाली गई। मां के स्वागत के लिए सबसे पहले सड़क पर झाड़ू लगाकर सफाई की गई। इसके बाद पानी से सड़क धोकर फूलों की कालीन बिछाई गई। फूलों से सजे इसी रास्ते से देवी को पंडाल में लाया गया। सड़क के दोनों ओर खड़े हजारों श्रद्धालुओं की प्रार्थना, श्रद्धा और भावनाओं ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। वर्षों से यह आगमनी शोभायात्रा डॉल्फिन क्लब की पूजा की खास पहचान बनी हुई है।

आगामी 8 नवंबर, रविवार को रानी मां की मुख्य पूजा और आराधना होगी। वहीं, 10 नवंबर, मंगलवार की शाम श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाएगा।

आयोजकों का कहना है कि पूजा की भव्यता और पंडाल की आकर्षक सजावट के साथ-साथ लोगों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचाना भी उनका उद्देश्य है। यही वजह है कि इस बार जहां पूजा की थीम में आत्मदर्शन की भावना को जगह दी गई है, वहीं उद्घाटन समारोह में बुजुर्ग माताओं के प्रति सम्मान और प्रेम को प्राथमिकता दी गई है।

कुल मिलाकर डॉल्फिन क्लब की 41वीं काली पूजा में देवी आराधना और मानवीय संवेदना का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। पंडाल के आईनों में अपनी छवि निहारते हुए जहां श्रद्धालु अपने भीतर की देवी को तलाशेंगे, वहीं वृद्धाश्रम की माताओं के हाथों पूजा का उद्घाटन उन्हें यह संदेश देगा कि देवी को केवल प्रतिमा में ही नहीं, बल्कि अपने आसपास मौजूद जीवित माताओं में भी देखना और उनका सम्मान करना चाहिए।

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