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दिव्यांग कोटे से रियायत का लाभ उठाकर यात्रा करते 11 फर्जी यात्री गिरफ्तार, खड़गपुर स्टेशन पर जांच में पकड़े गए

कोलकाता, विशेष संवाददाता : दूरगामी ट्रेनों में दिव्यांग कोटे के तहत टिकट पर रियायत का लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में गैर दिव्यांग लोग दिव्यांग का नाटक कर फर्जी तरीके से यात्रा कर रहे हैं। इस बारे में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे की एंटी फ्राड टीम ने निगरानी रखकर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य वाणिज्य प्रबंधक मनोज कुमार के नेतृत्व में एंटी फ्राड टीम के निरीक्षकों ने शनिवार को खडग़पुर व आद्रा डिवीजन के टिकट चेकिंग स्टाफ के साथ मिलकर दो ट्रेनों में चेकिंग की, जिसमें 11 फर्जी दिव्यांग यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि ये लोग दिव्यांग कोटे से टिकट बुकिंग कर यात्रा कर रहे थे, जिसमें 75 प्रतिशत की रियायत मिलती है। एक अधिकारी ने बताया कि चेकिंग में ट्रेन संख्या 22612/ न्यू जलपाईगुड़ी- मद्रास एक्सप्रेस से नौ यात्रियों और 22641/ त्रिवेंद्रम शालीमार एक्सप्रेस के दो यात्रियों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि खडग़पुर स्टेशन पर यह अभियान चलाया गया। पूछताछ में पता चला कि ये लोग दिव्यांग नहीं हैं और फर्जी दिव्यांगता कागजात के आधार पर दिव्यांग कोटे से ई- टिकट की बुकिंग कर यात्रा कर रहे थे। इसके बाद सभी 11 लोगों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी, खडग़पुर को सौंप दिया गया है।  अधिकारी के अनुसार, इस तरह फर्जी दिव्यांग यात्रियों ने रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। शिकायतों के बाद रेलवे पिछले कई महीनों से इसपर निगरानी रख रही है। जांच में पता चला है कि फर्जी पास का इस्तेमाल कर देशभर में विभिन्न ट्रेनों में सैकड़ों बर्थ बुक किए गए हैं, जिससे रेलवे को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

यह कहना है रेलवे अधिकारी का 

इस संबंध में पूछे जाने पर दक्षिण पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी केएस आनंद ने बताया कि रेलवे द्वारा समय-समय पर इस प्रकार की जांच की जाती है। इस तरह का विशेष अभियान तब चलाया गया जब ज्ञात हो गया कि दिव्यांग कोटा कई महीनों से भरा जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से दिव्यांग लोगों को यात्रा के लिए रेलवे द्वारा रियायत की यह सुविधा प्रदान की जाती है। चिकित्सा प्राधिकरण जो उन लोगों को ऐसा कार्ड जारी करता है इसपर विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि रेलवे में टिकट बुकिंग के समय संबंधित कर्मी एक पहचान पत्र देखते हैं और टिकट देते हैं। अधिकारी के अनुसार, टिकट देते समय यह जांचना बहुत असंभव है कि कार्ड असली है या नकली।

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