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अलग मिथिला राज्य के बिना मिथिला का विकास संभव नहीं, विद्यापति के जन्मस्थली से शुरू होगा जनसंयोग पदयात्रा : अशोक झा

मधुबनी, संवाददाता : मिथिला के सर्वांगीण विकास के मुद्दे पर विभिन्न संगठनों के द्वारा मिथिला के विभिन्न जिलाओं के अलावा कोलकता, दिल्ली समेत देश के विभिन्न भूभागों में रस वस रहे मिथिला वासियों की ओर से यदा कदा मुखर आवाज उठाया जाता रहा है। इसी क्रम में अलग मिथिला राज्य की मांग व इसके सर्वांगीण विकास के मुद्दे पर पृथक राजनैतिक दल के गठन पर मधुबनी जिले के लोहा ग्राम में सोमवार को एक सभा का आयोजन किया गया। उक्त सभा की अध्यक्षता ललन झा ने की।इस मौके पर प्रधान वक्ता के रूप में उपस्थित मिथिला विकास परिषद के अध्यक्ष अशोक झा ने कहा कि अलग मिथला राज्य की स्थापना के बिना मिथिला का सर्वांगीण विकास कभी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मिथिला के लोगों के स्वभाव में आमूल परिवर्तन लाना होगा। उन्होंने कहा कि मिथिला के लोगों को ना ही चापलूसी करने आती है और ना ही मिथिला के विकास के लिए लड़ना आता है। जिस दिन मिथिला के लोग हाथ में छह फीट का लाठी लेकर पटना कूचकर देंगे उसी दिन मिथिला में आये दिन आ रही बाढ़ की दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मिथिला के लोग विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को उनकी औकात दिखाएं, जो मिथिला- मैथिली के नाम पर राजनीति कर अपनी सत्ता चमकाते हैं। झा ने इस दौरान मिथिला के सर्वांगीण विकास के मुद्दे पर राजनैतिक दल गठन की आवश्यकता पर जनमत संग्रह कराने के लिए महाकवि विद्यापति की जन्मस्थली विस्फी, मधुबनी  से जल्द मथिला विकास परिषद, द्वारा “जनसंयोग पदयात्रा ” प्रारंभ करने की घोषणा की। जिसका सभा में उपस्थित सभी लोगों ने समर्थन किया। सभा में मिथिला के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। इस मौके पर अभय चौधरी, श्रीश मंडल, लालू झा, कृपा नाथ पाठक, सब्बीर अंसारी, मोहित यादव, शैल झा, हिमांशु चौधरी, चंद्र मोहन झा “परवा”, प्रोफेसर उदय शंकर मिश्रा, राम बरन चौधरी, कमल किशोर झा आदि उपस्थित थे।

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