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दूरी नहीं, दिलों को जोड़ती हैं ये पटरियाँ: पूर्व रेलवे ने साझा राष्ट्रीय धरोहर की सुरक्षा हेतु जनता से की अपील

कोलकाता – पश्चिम बंगाल।

पूर्व रेलवे की रेलगाड़ियाँ प्रतिदिन लाखों लोगों के सपनों को अपने साथ लेकर चलती हैं। अपने सपनों को पूरा करने के लिए यात्रा करता छात्र, बूढ़े माता-पिता से मिलने की जल्दी में बेटी, या दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद घर लौटता मज़दूर—इन सभी को एक सूत्र में बाँधती हैं भारतीय रेल की पटरियाँ। पूर्व रेलवे के लिए यात्री केवल यात्री नहीं, बल्कि उसके परिवार के सदस्य हैं। इसी भावना के साथ यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा एवं निर्बाध यात्रा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने कहा है कि रेलवे देश की जनता की अमूल्य संपत्ति है। किंतु इस साझा धरोहर की रक्षा के लिए पूर्व रेलवे पूरी दृढ़ता के साथ यह स्पष्ट करता है कि जो भी व्यक्ति ‘रेल रोको’ जैसे आंदोलनों के माध्यम से यात्रियों की यात्रा में बाधा उत्पन्न करेगा, उनकी सुरक्षा एवं सुविधा से समझौता करेगा अथवा रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँचाएगा, उसके विरुद्ध सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय रेल केवल लोहे, इस्पात और पत्थरों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह देश की जीवनरेखा है, जिसका निर्माण जनता की मेहनत की कमाई से हुआ है। जब किसी एक रेलगाड़ी का परिचालन बाधित होता है या किसी रेल कोच को क्षति पहुँचती है, तो इसका प्रभाव केवल रेलवे प्रशासन पर नहीं पड़ता, बल्कि चिकित्सा सामग्री की प्रतीक्षा कर रहे मरीज, अपनी आजीविका के लिए प्रतिदिन यात्रा करने वाले श्रमिक तथा स्टेशन पर अपने परिजनों की प्रतीक्षा कर रहे असंख्य परिवार भी इससे प्रभावित होते हैं। ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जन विश्वास अधिनियम, 2026 के अंतर्गत रेलवे अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। माननीय राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत यह अधिनियम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है। इन संशोधनों का उद्देश्य यात्रियों की गरिमा, सुरक्षा तथा रेलवे अनुशासन से समझौता करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

पूर्व रेलवे ने यात्रियों की शांति एवं सुविधा को सर्वोच्च महत्व देते हुए रेलवे अधिनियम की धारा 145 के प्रावधानों को और अधिक सख्त बना दिया है। अब यदि कोई व्यक्ति नशे की अवस्था में पाया जाता है, यात्रियों को असुविधा पहुँचाता है, अशोभनीय अथवा अभद्र आचरण करता है, अपमानजनक या अश्लील भाषा का प्रयोग करता है अथवा रेलवे द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं में बाधा उत्पन्न करता है, तो उस पर तत्काल 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि चेतावनी दिए जाने के बाद भी ऐसा आचरण जारी रहता है, तो ऐसे व्यक्ति को जवाबदेही से बचने से रोकने के लिए छह महीने तक की जेल या 5,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों की सख़्त सज़ा का प्रावधान किया गया है।

इसी प्रकार रेलवे कर्मचारियों को उनके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा पहुँचाने से संबंधित धारा 146 के अंतर्गत दंड एवं जुर्माने की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, ताकि रेलवे कर्मचारी यात्रियों की सुरक्षा एवं सेवा का दायित्व निर्बाध रूप से निभा सकें। इसके अतिरिक्त, धारा 155 के अंतर्गत रेलवे प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों के उल्लंघन पर उपधारा (1) के अंतर्गत 2,000 रुपये तथा उपधारा (2) के अंतर्गत 1,000 रुपये का निश्चित जुर्माना निर्धारित किया गया है। यदि दोषी व्यक्ति निर्धारित जुर्माने का भुगतान नहीं करता है, तो सक्षम न्यायालय उसके विरुद्ध 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त जुर्माना भी अधिरोपित कर सकता है। रेलवे परिसरों में यातायात व्यवस्था बनाए रखने हेतु धारा 159 के अंतर्गत भी प्रावधानों को सुदृढ़ किया गया है। यदि रेलवे परिसर में कोई वाहन चालक अथवा परिचालक रेलवे कर्मचारी अथवा पुलिस अधिकारी के वैध निर्देशों की अवहेलना करता है अथवा यातायात में बाधा उत्पन्न करता है, तो उस पर 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में न्यायालय आवश्यकतानुसार अतिरिक्त जुर्माना अथवा जेल का आदेश भी दे सकता है।

पूर्व रेलवे यह स्पष्ट करना चाहती है कि रेलवे से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या, शिकायत अथवा मांग के समाधान हेतु प्रशासन सदैव संवाद के लिए तत्पर है। नागरिक अपनी समस्याओं एवं सुझावों को रेलवे के विभिन्न आधिकारिक एवं वैधानिक माध्यमों के जरिए सीधे प्रशासन तक पहुँचा सकते हैं। पूर्व रेलवे आमजन से विनम्र अपील करता है कि किसी भी विवाद के समाधान के लिए इन्हीं वैधानिक एवं शांतिपूर्ण माध्यमों का उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, आंदोलन अथवा रेल परिचालन में बाधा उत्पन्न करने वाले कृत्यों से दूर रहें, जिससे अन्य नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा, “रेलगाड़ियाँ केवल यात्रियों को नहीं, बल्कि देशवासियों की भावनाओं, आशाओं और सपनों को भी अपने साथ लेकर चलती हैं। पूर्व रेलवे हाथ जोड़कर सभी नागरिकों से आग्रह करती है कि कृपया ‘रेल रोको’ जैसे आंदोलनों या रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसी गतिविधियों से दूर रहें। क्षणिक आक्रोश किसी दूसरे व्यक्ति की अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा को बाधित कर सकता है। पूर्व रेलवे यात्रियों की सेवा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है, किंतु यात्रियों की शांति एवं सुरक्षा भंग करने अथवा इस राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध संशोधित कानूनों के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं करेगी।”

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