–संघमित्रा सक्सेना, कोलकाता – पश्चिम बंगाल।
एबनॉर्मल हेयर लॉस एक बड़ी समस्या है। रोज 80 से 100 बाल झरना सामान्य हैं लेकिन जब ये मैसिव हो जाती है, तब सोचना पड़ता है। अगर बाल झरने के साथ साथ स्कैल्प प्लेन होना शुरू हो जाता है, तब इसे एलोपेशिया कहते है। एलोपेशिया बालों की नॉनक्यूरेबल बीमारी है।
●एलोपेशिया कितने प्रकार की होती है?
एलोपेशिया कुल 4 प्रकार के होते है।
•एलोपेशिया टोटलिस
•एलोपेशिया सेनालिस
•एलोपेशिया प्रीमैच्योर
•एलोपेशिया एरिएटा
●मेल पैटर्न बोल्डनेस क्या है?
यह ऐसा हेयर लॉस बीमारी है जिसमें इंसान के संपूर्ण शरीर के बाल झड़ने लगते है। जानकारी के मुताबिक, जिसका मुख्य कारण मेटाबोलिक समस्या है।
●एलोपेशिया सेनालिस क्या है?
एलोपेशिया सेनालिस अधिकतर 40 के बाद होता है। फिर धीरे धीरे बालों का झड़ना बढ़ने लगता है और बोल्डनेस की समस्या बनती है।
●एलोपेशिया प्रीमैच्योर
एलोपेशिया प्रीमैच्योर 40 के पहले ही शुरू हो जाता है। ज्यादातर ऑयली स्कैल्प में एलोपेशिया प्रीमैच्योर की लक्षण बढ़ता नज़र आता है। हेयर साइंस के मुताबिक हार्मोनल प्रॉब्लम, ह्यूमिड क्लाइमेट, स्पाइसी फूड से प्रीमेच्योर एलोपेसिया बढ़ता है।
●एलोपेशिया एरिएटा क्या है?
अचानक से बालों में पैच बनता दिखाई देना। यह पैच वन एंड हॉफ इंच से लेकर 3 इंच तक बनता है। पैच वाले जगह से बाल झड़ जाते हैं और पैच वाले एरिया स्मूथ हो जाते हैं बाकी स्कैल्प के तुलना में। जहां बाकी स्कैल्प खुदरा होता है वही एलोपेसिया अरेटा वाले स्थान स्मूथ होते हैं। जानकारी के मुताबिक टाइफाइड इनफ्लुएंजा नर्वस शॉक से एलोपेसिया अरेटा जैसी बीमारी होती है।
एलोपेसिया की बीमारी अधिकतर पुरुषों में ही पाया जाता है। पुरुष और महिलाओं की तुलना करें तो एलोपेसिया बीमारी से ग्रस्त महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में काम है। बता दे कि भारत में एलोपेसिया के बीमारी से ग्रस्त की परसेंटेज 0.1% से 0.2% है। सूत्रों के अनुसार भारतीय पुरुष में ज्यादातर एंड्रोजेनिक एलोपेसिया यानी एलोपेशिया प्रीमैच्योर की समस्या दिखती है। भारत के 30 से कम आयु वाले आनुमानिक 47% पुरुष एंड्रोजेनिक एलोपेसिया की समस्या से गुजर रहे हैं। जिन्हें मेल पैटर्न बोल्डनेस भी कहा जाता है। वहीं महिलाओं में 20 से 30% महिलाएं गंभीर रूप से बाल झड़ने की समस्या से ग्रसित है। देखा जाए तो महिलाओं की तुलना पुरुष किस बीमारी से अधिक ग्रसित होते हैं।
●कैसे हेयर लॉस कंट्रोल करेंगे?
•टाइट पोनीटेल बांधना बंद करें। इससे महिलाओं की फ्रंटलाइन हेयर चौड़ी हो जाती है और फोरहेड बड़ा दिखने लगता है।
•रेगुलर ड्रायर उसे करना बंद करें।
•महीने में एक बार हेयर स्पा जरूर करे।
•हेयर ब्रेकेज ओर डैमेज को अनदेखा न करें, इसके लिए हेयर स्टाइलिस्ट के साथ परामर्श के उपरांत सही ट्रीटमेंट ले।
•महीने में दो बार हॉट ऑयल थेरेपी जरूर करे।
•बायोटीन, विटामिन सी, आयरन और फोलिक एसिड से समृद्ध खाना डाइट में शामिल करें।
•हर 3 महीने में स्प्लिट एंड रिमूव करे।
•रेगुलर हेयर स्टाइलिंग और बैक कांबिंग करना बंद करें।
●बाल झड़ना रोकने के लिए कैसे करें बालों में कंघी?
बालों का झड़ना रोकने के लिए कंघी करते समय खास ध्यान रखना चाहिए। गीले बालों पर कभी भी कंगी नहीं करें। टॉवल से ड्राई करना बेहद जरूरी है। उसके उपरांत बालों में सीरम लगाना दूसरा महत्वपूर्ण काम है। तीसरी बात बालों में कंघी करते समय बड़े दांत वाले कंघी का ही इस्तेमाल करें।
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