हावड़ा – पश्चिम बंगाल।
■मोहल्लों में ‘स्मार्ट मीटर प्रतिरोध समिति’ बनाने की अपील
■आज हावड़ा मैदान में संगठन की ओर से मानव बंधन कर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।
जनहित के नाम पर केंद्र सरकार की ‘रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS)’ के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की पहल का ऑल बंगाल इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमर्स एसोसिएशन (ABECA) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन का आरोप है कि यह कोई उन्नत तकनीक नहीं, बल्कि कॉरपोरेट पूंजीपतियों के मुनाफे का नया माध्यम है।
5 जून 2026 को जारी एक पर्चे में ABECA के अध्यक्ष अनुकूल भद्र और महासचिव सुब्रत विश्वास ने कहा कि किसी भी कीमत पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने का विरोध किया जाना चाहिए।
●ABECA ने अपने विरोध के समर्थन में पांच प्रमुख कारण बताए हैं:
1. प्रीपेड प्रणाली लागू होने से उपभोक्ताओं को पहले से रिचार्ज कराना होगा। बैलेंस खत्म होते ही बिजली आपूर्ति बंद हो जाएगी।
2. दिन के अलग-अलग समय पर बिजली की दरें अलग-अलग होंगी। मांग बढ़ने पर बिजली की कीमत भी बढ़ाई जा सकेगी।
3. ऑपरेटर चाहे तो पोस्टपेड कनेक्शन को भी प्रीपेड में बदल सकेगा।
4. ‘यूनिवर्सल सर्विस’ व्यवस्था समाप्त कर ‘पिक एंड चूज’ प्रणाली लागू होने पर ऑपरेटर किसी क्षेत्र की बिजली बंद कर अधिक कीमत पर बिजली बेच सकेगा।
5. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए एक ऑपरेटर 40 से 50 हजार उपभोक्ताओं का काम संभाल सकेगा, जिससे मीटर रीडरों सहित हजारों कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होंगी।
संगठन का यह भी दावा है कि कोलकाता में घोषणा की गई है कि अगले दो महीनों के भीतर राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने का काम शुरू होगा। प्रत्येक मीटर की कीमत 100 रुपये प्रतिमाह की दर से 91 महीनों तक उपभोक्ताओं से किस्तों में वसूली जाएगी। यदि 8 वर्षों के भीतर मीटर खराब हो जाता है, तो उपभोक्ताओं को नया मीटर लगवाने के लिए फिर से भुगतान करना होगा।
ABECA ने राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने-अपने क्षेत्रों में ‘स्मार्ट मीटर प्रतिरोध समिति’ गठित करने और व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की अपील की है।
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