उलुबेरिया – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
सरकारी जमीन को कथित तौर पर अवैध तरीके से ईंट भट्ठों को लीज पर देकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने का आरोप श्यामपुर की भागीरथी को-ऑपरेटिव ज्वाइंट फार्मिंग सोसाइटी लिमिटेड पर लगा है। हाल ही में संस्था की 47वीं वार्षिक आम सभा में शामिल हुए श्यामपुर के विधायक हिरण्मय चट्टोपाध्याय के सामने यह मामला आया, जिसके बाद उन्होंने जमीन के दस्तावेजों और पूरे मामले को लेकर संदेह जताया। इस संबंध में संस्था के शेयरधारकों ने प्रशासन के विभिन्न विभागों में शिकायत भी दर्ज कराई है।
जानकारी के अनुसार, श्यामपुर-1 ब्लॉक के शिवगंज में यह संस्था स्थित है। हाल ही में संस्था की 47वीं वार्षिक आम सभा आयोजित की गई थी। इसमें श्यामपुर के विधायक हिरण्मय चट्टोपाध्याय विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। बैठक में संस्था की ओर से सदस्यों के सामने वार्षिक रिपोर्ट पेश की गई। इसी दौरान जमीन से जुड़ा मामला विधायक के संज्ञान में आया।
आरोप है कि विधायक ने संस्था के सचिव से उनके अधीन मौजूद जमीन की कुल मात्रा के बारे में पूछा तो उन्होंने करीब 30 बीघा जमीन होने की बात कही। हालांकि, वार्षिक रिपोर्ट में करीब 300 बीघा जमीन विभिन्न ईंट भट्ठों को लीज पर दिए जाने का उल्लेख सामने आया। आरोप है कि इन जमीनों से संस्था को करोड़ों रुपये की आय हो रही है।
मामला सामने आने के बाद विधायक हिरण्मय चट्टोपाध्याय ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने जमीन की लीज से संबंधित दस्तावेज देखने की इच्छा जताई तो उन्हें बताया गया कि सरकार ने वर्ष 1975 में संस्था को जमीन लीज पर दी थी, लेकिन वर्ष 1990 में वह लीज समाप्त हो गई। इसके बाद सरकार की ओर से नए सिरे से कोई लीज नहीं दी गई।
विधायक ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने संस्था को दोबारा जमीन लीज पर नहीं दी, तो संस्था ने सरकारी जमीन को ईंट भट्ठों को किस अधिकार से लीज पर दे दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी और महकमा शासक (एसडीओ) से कहा है।
हिरण्मय चट्टोपाध्याय ने कहा कि यदि कोई सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर उसे लीज पर देकर करोड़ों रुपये की कमाई करता है, तो उस रकम को सरकारी खजाने में जाना चाहिए। यदि सरकारी राजस्व में पैसा जमा करने के बजाय उसका कथित तौर पर गबन किया गया है, तो पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।
विधायक ने कहा, “श्यामपुर में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अवैध तरीके से सरकारी जमीन पर कब्जा करके रखना भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिस सोसाइटी के पास जमीन नहीं है, अगर वह अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा कर उसे ईंट भट्ठों को लीज पर देती है और उससे करोड़ों रुपये की कमाई करती है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। कानून अपना काम करेगा।”
वहीं, संस्था के शेयरधारकों का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। उनका आरोप है कि वार्षिक आम सभा में भी उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। किसी मामले के बारे में जानकारी मांगने पर कथित तौर पर उन्हें धमकी दी जाती थी। शेयरधारकों ने भी पूरे मामले की जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, इस संबंध में संस्था के अध्यक्ष और सचिव से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों के फोन बंद होने के कारण उनका पक्ष नहीं मिल सका।
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