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हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर सुपर डुपर हिट, बिजनेस 300करोड़

–संघमित्रा सक्सेना, कोलकाता – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीश तिहूं लोक उजागर। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनी पुत्र पवनसुत नामा। जी हां एक ऐसा ही अंजनी पुत्र पर बनी फिल्म हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच रहा है। दर्शक नंगे पांव हनुमान अंश मूवी देखने जा रहे हैं। मल्टीप्लेक्स के अंदर टीका लगाकर दर्शकों का स्वागत हो रहा है। मूवी देख बाहर निकलते वक्त सभी दर्शकों को हनुमान जी का प्रसाद खिलाया जा रहा है।

दरअसल विश्वास और आस्था हो तो पत्थर में भी भगवान नजर आते हैं। इंसान के अच्छे कर्म उन्हें उनके मृत्यु के बाद भी याद करते हैं कुछ ऐसा ही कहानी है नीम करोली बाबा की। जिन पर आधारित फिल्म का नाम हनुमान अंश हैं।

●ऐसा क्या है इस फिल्म में?

नीम करोली बाबा एक सामान्य संत थे। 20वीं सदी के इस संत को उनके भक्त हनुमान जी के अवतार मानते थे। जहां आजकल बाबा पर से भरोसा ही उठ चुका है लोगों का वही नीम करोली बाबा अपनी सेवा धर्म से आज भी सबके दिल में विराजमान हैं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स तथा फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग एवं जैसे गुणी लोग नीम करोली बाबा के संस्पर्श में आए थे।

इस फिल्म में सबसे खास बात है- भूखे को खाना खिलाने का आदर्श, असहाय को सहायता प्रदान करने का साहस, प्रेम की राह पर चलने की शिक्षा, धैर्य और मानवता के धर्म को पालन करने की अपील तथा शिक्षा के माध्यम से अपने भक्तों के अंदर नई दिशा और नई ऊर्जा को दर्शाना।

●कहां है बाबा की मंदिर?

उत्तराखंड के नैनीताल के पास कैंची धाम में बाबा की बनाई हुई हनुमान जी की मंदिर आज भी प्रसिद्ध हैं। देश और विदेशों से भक्त इस मंदिर की दर्शन करने आते हैं।

●नीम करोली बाबा क्यों कहा जाता है?

साधारण परिवार में जन्मे लक्ष्मी नारायण बहुत ही साधारण तरीके से बड़े हुए थे। समय के साथ-साथ उन्हें आध्यात्मिक चेतना का एहसास हुआ। मात्र 17 साल की उम्र में संत घोषित हुए और घर परिवार त्याग दिये। लक्ष्मी नारायण के पिता बेटे की इस सिद्धांत से चौंक गए थे और उन्हें परिवार की चिंता हो रही थी। पिता के अनुरोध पर 17 वर्षीय लक्ष्मी नारायण घर वापस आए और अपनी गृहस्थी संभालने लगे। सन 1958 में उन्होंने पुनः सन्यास लिया। इसके बाद से उनके जीवन का मूल मंत्र था मानव सेवा। फिरोजाबाद के संत लक्ष्मी नारायण एक बार ट्रेन से सफर कर रहे थे। उनके पास टिकट नहीं था। टीटी ने उन्हें नीम करोली स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया। यहीं पर चमत्कार की शुरुआत हुई। संत लक्ष्मी नारायण ट्रेन से उतर गये लेकिन ट्रेन वहीं पर खड़ा रहा। लाख कोशिशें के बावजूद भी ट्रेन आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद जब टीटी के अनुरोध पर संत लक्ष्मी नारायण ने फिर से ट्रेन में बैठा तो ट्रेन पुन: चलने लगी। तब से संत लक्ष्मी नारायण का नया नाम नीम करोली बाबा हुआ। इन पर लोगों की आस्था और भरोसा असीम था।

●हनुमान अंश और नीम करोली बाबा की सुपरहिट केमिस्ट्री

मिर्जापुर, हैवांन, पुष्पा, धुरंधर पठान दंगल जैसी बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाली मूवी को चारों थाने चीत करते हुए 300 करोड़ की प्रॉफिट की ओर बढ़ती जा रही है हनुमान अंश। जानकारी के अनुसार इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड भी कमाई की है। रोज बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई के आंकडे बढ़ते जा रहे है।

●फिल्म बनने में कितना खर्च हुआ?

फिल्म को बनाने में सिर्फ दो करोड़ खर्च हुआ था।

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