हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
एक विशाल शालुक के पत्ते पर बैठकर पानी में तैरता हुआ एक वयस्क व्यक्ति! सुनने में भले ही यह अविश्वसनीय लगे, लेकिन हावड़ा के शिबपुर स्थित आचार्य जगदीशचंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान में इन दिनों ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। इससे पहले इस तरह के पत्ते पर बच्चों के तैरने के दृश्य सामने आए हैं, लेकिन 80 से 100 किलो या उससे अधिक वजन वाले वयस्क व्यक्ति को भी इस विशाल पत्ते पर बैठाकर पानी में तैराने की यह पहल भारत में पहली बार की जा रही है, ऐसा उद्यान प्रबंधन का दावा है।
बोटानिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक डॉ. कनाद दास की मौजूदगी में जायंट वॉटर लिली यानी ‘विक्टोरिया अमेजोनिका’ के विशाल पत्ते पर तैरने के इस विशेष एडवेंचर की शुरुआत हुई। पिछले कुछ दिनों में उद्यान के विशेषज्ञ कर्मचारियों से लेकर वहां आने वाले कई आम लोगों ने भी इस विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैरने का अनुभव लिया है।
भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया में वनस्पति संरक्षण और शोध के क्षेत्र में हावड़ा का बोटानिकल गार्डन यानी आचार्य जगदीशचंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान एक महत्वपूर्ण संस्थान है। अमेजन के जंगलों में पाई जाने वाली विशाल जलीय वनस्पति ‘विक्टोरिया अमेजोनिका’ भी लंबे समय से इस उद्यान के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। शुरुआत में इस जायंट वॉटर लिली को एक ही जलाशय में संरक्षित किया जाता था। हालांकि, वर्ष 2020 में चक्रवाती तूफान अम्फान के दौरान यह पौधा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसके बाद संरक्षण के साथ-साथ आम दर्शकों को इस दुर्लभ जलीय वनस्पति को आसानी से दिखाने पर भी जोर दिया गया। इसी योजना के तहत उद्यान के अलग-अलग हिस्सों में स्थित 16 जलाशयों में विक्टोरिया अमेजोनिका का संरक्षण शुरू किया गया।
शोधकर्ता डॉ. आर. सरवनन ने बताया कि इस उद्यान में देश-विदेश की कई तरह की जलीय वनस्पतियां संरक्षित हैं। हालांकि, आम लोगों के बीच जायंट वॉटर लिली को लेकर सबसे अधिक आकर्षण और जिज्ञासा रहती है। इसकी सबसे बड़ी वजह इसके विशाल आकार के पत्ते और कांटेदार लंबे तने हैं। विक्टोरिया अमेजोनिका का फूल इसके पत्ते की तुलना में काफी छोटा होता है और इसका रंग गुलाबी होता है। यह जलीय वनस्पति मुख्य रूप से अपने विशाल पत्तों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
डॉ. सरवनन ने इस पहल की सफलता के लिए डॉ. कनक दास और गार्डन इंचार्ज मानस भौमिक की भूमिका की भी सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया।
एक वयस्क व्यक्ति का वजन इतना विशाल पत्ता किस तरह सहन कर सकता है, इसे लेकर भी दर्शकों में काफी जिज्ञासा है। उद्यान प्रबंधन की पहल पर फिलहाल प्रयोग के तौर पर 80 से 100 किलो या उससे अधिक वजन वाले वयस्क लोगों को भी इस पत्ते पर बैठाकर पानी में तैराया जा रहा है।
हालांकि, इस दौरान पत्ते को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। पत्ते के ऊपर और नीचे दो तैरने वाले सहायक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे व्यक्ति का वजन सीधे पत्ते पर पड़ने के बजाय संतुलित रूप से वितरित होता है और पत्ता टूटने या फटने की आशंका कम हो जाती है।
उद्यान के शोधकर्ताओं और अधिकारियों के अनुसार, विक्टोरिया अमेजोनिका में फूल आने से पहले बड़े-बड़े पत्ते विकसित होते हैं। इसी दौरान उपयुक्त और मजबूत पत्तों का चयन कर इस विशेष पहल को अंजाम दिया जा रहा है।
बोटानिकल गार्डन के गेट नंबर-1 से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित जलाशय के एक हिस्से को इसके लिए चिह्नित किया गया है। इसी स्थान पर जायंट वॉटर लिली के विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैरने का यह अनोखा एडवेंचर चलाया जा रहा है।
उद्यान प्रबंधन के अनुसार, अगले वर्ष से इस अनुभव को आम दर्शकों के लिए भी शुरू करने की योजना है। आमतौर पर फरवरी से जुलाई तक जायंट वॉटर लिली का मौसम रहता है। ऐसे में उस दौरान बोटानिकल गार्डन आने वाले लोगों को इस दुर्लभ जलीय वनस्पति को देखने के साथ-साथ इसके विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैरने का अनोखा अनुभव भी मिल सकेगा।
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