–संघमित्रा सक्सेना, कोलकाता – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
उत्तर कोलकाता के दमदम क्षेत्र में सेंटर सिटी के स्थानीय लोगो ने हर्षोल्लास के साथ दशहरा मनाया। बुधवार स्थानीय महिलाएं देवी दुर्गा के पूजा उपरांत, देवी मां को लगाई गई सिंदूर से अपनी अपनी मांग भरी और एक दूसरे की मांग पर सिंदूर लगाकर सिंदूर खेल की रिवाज पुरी की।
●सिंदूर खेला की शुरुआत कैसे हुई?
जानकारी के मुताबिक सिंदूर खेला की शुरुआत करीबन 200 साल पहले हुआ था। दरअसल जमींदारो की पत्नियां देवी को विदा करने से पहले उनकी मांग से छुआ हुआ सिंदूर, एक दूसरे सुहागन महिलाओं की मांग पर लगती हैं, खुदकी मांग भी भरती हैं। एक और शोध के मुताबिक सिंदूर खेल 800 साल पुरानी रिवाज हैं लेकिन इसके बारे में सटीक तथ्य की अभाव है।
●सिंदूर खेला सप्तमी, अष्टमी में भी होता हे
राज्य के कुछ खास दुर्गा उत्सव है जहां सिंदूर खेला सप्तमी और अष्टमी के दिन ही हो जाती है। दुबराजपुर में सिंदूर खेला सप्तमी में होती है। वर्धमान जिले की मेमोरी के बिज़ार गाँव में सिंदूर खेला अष्टमी के दिन होता है। कथित है कि पुराण को मानकर यहां अष्टमी के दिन सिंदूर खेला सेलिब्रेट किया जाता है।
●विदेश में कहां का सिंदूर खेला चर्चित है?
इंडियन सेवाश्रम संघ शिकागो यूएसए, बंगाली कल्चर एंड सोशल क्लब इन लंदन लीड्स दुर्गा पूजा और दिवाली संगठन की सिंदूर खेला काफी चर्चित है।
अतः हिंदू संस्कृति और रीति के अनुसार सिंदूर खेल शादीशुदा महिलाओं के लिए पवन रीति है जिन्हें पालन करते हुए वह अपने सुहाग की लंबी कामनाएं करती है।
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