हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
दीपावली में अब ज्यादा दिन शेष नहीं हैं। श्यामा पूजा से पहले बाजार में मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने लगी है, लेकिन इस बार दीयों की पर्याप्त आपूर्ति को लेकर कुम्हारों की चिंता बढ़ गई है। इसकी मुख्य वजह मिट्टी की कमी है। पर्याप्त मात्रा में और समय पर मिट्टी नहीं मिलने के कारण दीये बनाने का काम प्रभावित हो रहा है। ऐसे में आगामी दीपावली पर बाजार में मिट्टी के दीयों की कमी होने की आशंका संगठन के जिला नेतृत्व ने जताई है।
दीपावली और मिट्टी के दीयों का गहरा संबंध है, लेकिन इस बार दीये बनाने का प्रमुख कच्चा माल मिट्टी ही आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वेस्ट बंगाल अर्थ पॉट मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अच्छे लाल प्रजापति ने बताया कि मुख्य रूप से डायमंड हार्बर से मिट्टी आती है, लेकिन मांग के अनुरूप और निर्धारित समय पर मिट्टी नहीं मिल पा रही है। मिट्टी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर महीने जिलाधिकारी से आवेदन करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मिट्टी की कमी के कारण कई बार कारीगरों को अपना काम बंद रखना पड़ता है।
आमतौर पर मिट्टी के कुल्हड़ और हांडी बनाने वाले कारीगर ही दीपावली के दौरान दीये तैयार करते हैं। लेकिन इस बार मिट्टी की कमी के कारण उन्हें दीये बनाने का काम शुरू करने में भी परेशानी हो रही है। संगठन के पदाधिकारियों का दावा है कि पिछले 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर दीप जलाने के कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में दीयों की आपूर्ति की गई थी, जिससे पहले से उपलब्ध भंडार भी कम हो गया है। ऐसे में संगठन के जिला अध्यक्ष ने मिट्टी की आपूर्ति जल्द सामान्य करने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
डोमजूर के डांशीपाड़ा इलाके के कुम्हारों ने भी इसी समस्या की जानकारी दी है। उनका कहना है कि मिट्टी की कमी के कारण महीने में 12 दिनों से अधिक समय तक काम बंद रखना पड़ रहा है। हर साल दीपावली से पहले वे बड़ी संख्या में मिट्टी के दीये तैयार करते हैं, लेकिन इस बार पर्याप्त मिट्टी नहीं मिलने से उत्पादन काफी कम हो गया है। इसके अलावा मिट्टी की कीमत लगभग दोगुनी हो जाने के कारण दीयों के दाम भी बढ़ने की आशंका है। लिलुआ भट्टो नगर के रहने वाले राजेश प्रजापति ने बताया कि पिछले कई वर्षों से मिट्टी के दीए की मांग बढ़ी है लेकिन मिट्टी के समय पर उपलब्ध नहीं होने से सुविधा होती है इस बार बारिश भी बीच में रुक-रुक कर हुआ है क्योंकि 17 सितंबर को काफी संख्या में तैयार किए गए दिए की बिक्री हो गई थी फिर से दीए बनाने का काम किया गया जो चल रहा है लेकिन इस बार दिवाली के अवसर पर कुल मिलाकर देखा जाए तो दीए की मांग बढ़ी है लेकिन हम लोगों को कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है महंगाई के कारण मिट्टी के दाम बढ़ रहे हैं लेकिन मिट्टी के दिए के दाम ज्यादा नहीं मिलने से लाभ कम होता है और नए युवक इस कारवार में जुड़ना नहीं चाह रहे हैं।
कुल मिलाकर, यदि जल्द मिट्टी की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो इस बार दीपावली पर मिट्टी के दीयों की कमी के साथ उनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे जहां आम खरीदारों की जेब पर असर पड़ेगा, वहीं कुम्हारों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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