हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद हावड़ा जिले में स्कूलों के मिड-डे मील की जिम्मेदारी अक्षय पात्र फाउंडेशन को सौंपने की पहल की गई थी। हालांकि, जिले में संस्था के काम शुरू करने से पहले ही उसका ठेका रद्द कर दिया गया। इसके बाद मिड-डे मील की जिम्मेदारी किस संस्था को दी जाएगी, यह अभी तक तय नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल पहले की व्यवस्था के तहत ही जिले के स्कूलों में मिड-डे मील तैयार कर बच्चों को खिलाया जा रहा है।
जिला प्राथमिक शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, हावड़ा जिले में वर्तमान में कुल 2,079 प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से अधिकांश स्कूलों में पहले की तरह स्कूल परिसर में ही मिड-डे मील तैयार कर बच्चों को परोसा जा रहा है। वहीं, कुछ इलाकों में कम्युनिटी किचन के माध्यम से खाना तैयार कर स्कूलों तक पहुंचाया जा रहा है।
जिला प्राथमिक शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया है कि वर्तमान सरकार ने मिड-डे मील के लिए आवंटन में बढ़ोतरी की है। इसके चलते भोजन की मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता में भी पहले की तुलना में सुधार किया गया है। आवंटन बढ़ने के कारण बच्चों के भोजन के मेन्यू और मात्रा में भी कुछ बदलाव करना संभव हुआ है।
एक प्राथमिक स्कूल के प्रधान शिक्षक ने बताया कि पहले की तुलना में मिड-डे मील की गुणवत्ता कुछ बेहतर हुई है। हालांकि, स्कूल में शिक्षकों को ही खाना बनाने और मिड-डे मील से जुड़े विभिन्न कार्यों की निगरानी करनी पड़ती है। इसके कारण उनका काफी समय इस काम में खर्च होता है। उनके अनुसार, यदि सरकार किसी एजेंसी या स्वयंसेवी संस्था के माध्यम से मिड-डे मील संचालन की व्यवस्था करती है, तो शिक्षक पढ़ाई पर अधिक समय दे सकेंगे।
श्री शांति विद्यालय के प्रधान शिक्षक ने कहा, “पहले की तुलना में मिड-डे मील कुछ बेहतर हुआ है। आवंटन भी करीब 3 रुपये बढ़ा है, जिससे भोजन की गुणवत्ता सुधारना संभव हुआ है। हालांकि, अगर मिड-डे मील की जिम्मेदारी किसी एजेंसी या एनजीओ को दे दी जाए, तो शिक्षकों को पढ़ाई के काम के लिए अधिक समय मिल सकेगा। सरकार सभी पहलुओं पर विचार करते हुए किसी स्पष्ट कानून या नीति के तहत फैसला ले तो बेहतर होगा।”
अब नजर इस बात पर है कि मिड-डे मील संचालन की जिम्मेदारी किसी नई संस्था को सौंपी जाएगी या पहले की तरह स्कूलों के माध्यम से ही यह सेवा जारी रहेगी।
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