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‘भक्ति ही शक्ति’ थीम पर रामकृष्णपुर पल्ली के 80वें दुर्गोत्सव का आगाज, अभिनेत्री ओलिविया सरकार ने किया उद्घाटन

हावड़ा – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।

भक्ति में ही शक्ति निहित है और भक्ति के मार्ग से ही ईश्वर की आराधना की जा सकती है। इसी विचार को केंद्र में रखकर इस बार हावड़ा के रामकृष्णपुर पल्ली सार्वजनिक दुर्गोत्सव को सजाया गया है। पूजा के 80वें वर्ष में इस बार की थीम ‘भक्ति ही शक्ति’ रखी गई है। बुधवार को महाचतुर्थी की शाम अभिनेत्री ओलिविया सरकार ने पूजा का शुभ उद्घाटन किया।

मंडप में मां दुर्गा की दस भुजाओं में दस अलग-अलग अस्त्रों को दर्शाया गया है, जो इस थीम को विशेष महत्व प्रदान करते हैं। उद्घाटन समारोह में पहुंचीं अभिनेत्री ओलिविया सरकार ने कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। इतनी सुंदर थीम और मां दुर्गा की दस भुजाओं में दस अस्त्रों की परिकल्पना बेहद अनूठी है। इस वर्ष यह पहली बार है, जब मैंने मां दुर्गा के दर्शन किए हैं। इसलिए यह मेरे लिए बेहद खास है। रामकृष्णपुर पल्ली की यह पूजा 80वें वर्ष में प्रवेश कर गई है। इतनी पुरानी पूजा से जुड़कर बहुत अच्छा लग रहा है। सभी को शारदीय पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। सभी स्वस्थ और खुशहाल रहें तथा पूजा का भरपूर आनंद उठाएं। मां दुर्गा से मेरी प्रार्थना है कि सभी अच्छे और स्वस्थ रहें।”

वहीं, पूजा कमेटी के संयुक्त सचिव संजय घोष ने बताया कि रामकृष्णपुर पल्ली का संबंध श्रीरामकृष्ण परमहंस की स्मृतियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, श्रीरामकृष्ण के गृहस्थ भक्त नवगोपाल घोष उनके बारे में सुनकर इस इलाके में आए थे। इसी सिलसिले में बाद में स्वामी विवेकानंद का भी यहां आगमन हुआ था और उन्होंने यहां प्रणाम मंत्र की रचना की थी।

संजय घोष ने कहा, “श्रीरामकृष्ण कहा करते थे कि कलियुग में भक्ति ही सब कुछ है। भक्ति के माध्यम से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है। भक्त का हृदय भगवान का बैठकखाना होता है। दूसरी ओर, मां दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं। हम शाक्त हैं और बंगाली समाज भी शाक्त परंपरा से जुड़ा है। प्रत्येक नारी में शक्ति का जो स्वरूप दिखाई देता है, वही इस आराधना का आधार है। इसलिए भक्ति के माध्यम से शक्ति की आराधना और ईश्वर की प्राप्ति के विचार को इस बार की थीम में प्रस्तुत किया गया है।”

थीम के अनुरूप मंडप में मां दुर्गा के दस अस्त्रों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। इनमें इंद्र का वज्र, शंख और भगवान शिव का नागपाश सहित अन्य अस्त्र शामिल हैं। मंडप की सजावट के माध्यम से प्रत्येक अस्त्र के महत्व को दर्शाने का प्रयास किया गया है। इसी अवधारणा के अनुरूप मां दुर्गा की प्रतिमा और उसकी साज-सज्जा भी तैयार की गई है।

पूजा कमेटी की ओर से बताया गया कि हर वर्ष नई अवधारणाओं और थीम के जरिए श्रद्धालुओं के सामने विशेष संदेश प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है। इस बार 80वें वर्ष में ‘भक्ति ही शक्ति’ थीम के माध्यम से भक्ति और शक्ति के अनूठे संगम को दुर्गोत्सव का मुख्य आकर्षण बनाने की पहल की गई है।

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