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बीएसएफ ने बांग्लादेश सीमा से बड़ी संख्या में जिंदा कारतूसों के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया

 

कोलकाता : बंगाल में पंचायत चुनाव के बाद जारी हिंसा के बीच बीएसएफ जवानों ने उत्तर 24 परगना जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास तस्करों के मंसूबे नाकाम कर बांग्लादेश से भारत में तस्करी की जा रही बड़ी संख्या में जिंदा कारतूसों (केएफ 7.65 मिमी) के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया है। रविवार को एक बयान में बताया गया कि दक्षिण बंगाल फ्रंटियर की सीमा चौकी जयंतीपुर इलाके से 05वीं वाहिनी के जवानों ने शनिवार को इसे जब्त किया। मौके से कुल 41 जिंदा कारतूस बरामद किया गया, जिसे बांग्लादेश से लाया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि जवानों ने शाम के वक्त तारबंदी के दोनों ओर बड़ी संख्या में बिखरे पड़े जिंदा कारतूसों को देखा। आसपास के इलाके की छानबीन की तो वहां कोई भी व्यक्ति दिखाई नहीं दिया। तत्पश्चात, जयंतीपुर इलाके में लगे गुप्त कैमरों की जांच की गई तो तारबंदी से आगे स्थित गांव से तारबंदी की तरफ दो लोगों की आवाजाही देखी गई। खुफिया जानकारी के आधार पर इन तस्करों की पहचान ग्यासुद्दीन मंडल (39) और मोहम्मद नजीर हुसैन मुल्ला (37), गांव-36 घरिया के रूप में हुई।

तत्पश्चात, बीएसएफ के खोजी दल ने ग्यासुद्दीन मंडल को उसके घर के पास से पकड़ा और पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि शाम को वह मुल्ला के साथ उक्त घटना में शामिल था। उसकी निशानदेही पर बीएसएफ ने मुल्ला को भी उसके घर के पास से दबोचा। मंडल ने आगे बताया कि मुल्ला के इशारे पर जवानों को गुमराह करने के लिए उसने किसान के भेष में तारबंदी के पास जाकर घास काटने का नाटक भी किया। इस बीच, मुल्ला जिंदा कारतूसों को एक प्लास्टिक की थैली में भरकर तारबंदी के पास आया और पार करने लगा। ऐसा करते समय थैली तारबंदी में फंसकर फट गई जिसकी वजह से सभी कारतूस बिखर गए। बीएसएफ जवानों के आ जाने के डर से घबराकर दोनों वापस अपने गांव की तरफ भाग गए। पकड़े गए तस्करों और जब्त कारतूसों को आगे की कार्रवाई के लिए पेट्रापोल थाने को सौंप दिया गया है। कारतूसों को किस उद्देश्य से और किसे देने के लिए लाया जा रहा था, इस बारे में पूछताछ जारी है।

 

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