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सावन के महीने में एक साथ एक ही जगह आपको द्वादश ज्योतिर्लिंगों का हावड़ा में दर्शन कर सकते हैं।

S k jha

हावड़ा : सावन के महीने में एक साथ द्वादश ज्योतिर्लिंग का दर्शन आप हावड़ा में एक ही जगह पर कर सकते हैं और वह भी एक ही मंदिर में।यूं तो सावन का महीना बाबा भोलेनाथ के नाम से ही विख्यात  है सावन में भोलेनाथ की पूजा विभिन्न शिवालयों में की जाती है इस दौरान लोग द्वादश ज्योतिर्लिंगों का दर्शन भी करते हैं, और अपने आप को इन ज्योतिर्लिंग ऊपर जल अर्पित कर व पूजा-अर्चना व दर्शन कर धन्य महसूस करते हैं ,लेकिन यह सबके बस की बात नहीं रही ,क्योंकि भारत के कोने कोने में घूम घूम कर भगवान भोलेनाथ के विभिन्न मंदिरों का दर्शन करना काफी खर्चीला है और समय अनुकूल भी नहीं हो पाता है ,

 

इन्हीं सब कारणों से उत्तर हावड़ा के बंगेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में 12 ज्योतिर्लिंगों के मंदिर का निर्माण किया गया है, यूं तो यह मंदिर काफी पुराना है और इस मंदिर प्रांगण में ही 2015 में तत्कालीन देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 51 फुट ऊंची भोलेनाथ की प्रतिमा का अनावरण किया था ।इसके कुछ वर्षों के उपरांत मंदिर के ट्रस्टी की ओर से यह सिद्धांत लिया गया कि पास में ही गंगा के किनारे जो जगह खाली पड़ा है, इस स्थान पर द्वादश ज्योतिर्लिंग का निर्माण किया जाए और इसके लिए कोलकाता के प्रसिद्ध मूर्तिकार मिंटू पाल की सहायता ली गई मिंटू पाल ने अपनी पूरी कारीगरी व कुशलता को यहां काम में लगाते हुए फाइबर व अन्य चीजों से द्वादश ज्योतिर्लिंगों के मंदिर की आकृति का निर्माण करना शुरू कर दिया,

यु तो बाहर से देखने पर यह मंदिर हु बहू मिलती है और इस मंदिर के अंदर सही में बाबा भोलेनाथ का शिवलिंग स्थापित है , जहां लोग पूजा अर्चना करते हैं।

देश में स्थित जगह जगह 12 ज्योतिर्लिंग ओके नाम हुआ स्थान इस प्रकार १. रामेश्वरम तमिलनाडु में स्थित है, २.  ओमकारेश्वर मध्यप्रदेश में में स्थित है, ३.सोमनाथ गुजरात में स्थित है, ४. मल्लिकार्जुन आंध्र प्रदेश मैं स्थित है, ५. महाकालेश्वर उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित है, ६.केदारनाथ उत्तराखंड में स्थित है, ७. भीमाशंकर  महाराष्ट्र में स्थित है,८ विश्वेश्वर काशी विश्वनाथ बनारस में स्थित है, ९. त्रंबकेश्वर महाराष्ट्र में स्थित है,१०. बैद्यनाथ धाम देवघर झारखंड में स्थित है,११. नागेश्वर गुजरात में स्थित है, १२. घुश्मेश्वर महाराष्ट्र में स्थित है। सोमवार के दिन यूं तो विभिन्न शिवालयों में लोगों की काफी भीड़ देखने को मिलती है इसी क्रम में इस मंदिर में भी काफी संख्या में भीड़ देखने को मिली मंदिर प्रशासन की ओर से समुचित व्यवस्था होने के कारण भक्तों को किसी भी तरह का असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता है ऐसा यहां आए भक्तों का कहना है उन्होंने बताया कि यहां आप अन्य मंदिरों की तुलना में शांतिपूर्वक अपनी इच्छा अनुसार भगवान की पूजा अर्चना कर सकते हैं,

पूजा करने आए भक्तों ने बताया कि एक साथ सावन के महीने में 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करना अपने आप में सौभाग्य की बात है जो यहां इस मंदिर प्रांगण में आने से ही मिल जाती है मैं बरसों से यहां आता हूं। वही मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर प्रभुनाथ तिवारी ने बताया कि यूं तो यह मंदिर काफी बरसों पुराना है लेकिन उस समय यहां पर सिर्फ गंगेश्वर महादेव मंदिर ही हुआ करता था और साथ ही कुछ अन्य भगवानों की मूर्तियां भी होती थी,

लेकिन समय के साथ-साथ बदलते हुए समय के अनुरूप यहां पर कई सारे देवी देवताओं के मंदिरों का निर्माण किया गया जिसमें रानी सती खाटू श्याम राम जानकी दरबार शिव पार्वती की मूर्ति के साथ अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां मन मोह लेती है यहां आए हुए भक्तों का। मंदिर के बिल्कुल नजदीक गंगा नदी के गुजरने से मंदिर का दृश्य और भी मनोरम लगता है। भक्त यहां आकर गंगा से जल ले भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। हावड़ा का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां आप एक साथ देश के तमाम कोने-कोने में फैले ज्योतिर्लिंगों का दर्शन कर सकते हैं।

 

 

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