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“अबोल तबोल” की झलक उत्तर कोलकता की नवीनपल्ली में

संघमित्रा सक्सेना
कोलकाता: मंगलवार हातीबगान नवीनपल्ली दुर्गापूजा की थीम लॉन्च हुआ। इस बार उत्तर कोलकाता नवीनपल्ली का थीम “अबोल तबोल” हैं। दुर्गापूजा और बांग्ला साहित्य की संबंध बहुत गहरा हैं। जिसे जितना भी जानने की कोशिश करेंगे उतना ही इसमें खो जायेंगे। सुकुमार रॉय भारतवर्ष के एक ऐसे कवि जिन्होंने साहित्य में हस्स्यरस की शुरुवात की थी।

 

आपको बता दे कि आज ही सुकुमार रॉय की “आबोल ताबोल” बांग्ला साहित्य के लिए माइलस्टोन साबित हुआ। *”आबोल ताबोल” और नवीनपल्ली में क्या संबंध है?*
दरहसल नवीनपल्ली अपनी दुर्गापूजा की 90 साल सेलिब्रेट कर रही हैं। इस आनंद उत्सव में नवीनपल्ली, देवी दुर्गा की आवाहन शिक्षा और संस्कृति को आगे रखकर करना चाहती हैं। इस भावना को ध्यान में रखते हुए नवीनपल्ली की चीफ ऑर्गेनाइजर दीप्त घोष ने हतीबागन नवीनपल्ली की थीम में “100 में अबोल तबोल” को चुना।

 

बता दे कि 1923 की 19 सितंबर इस महान कवि सुकुमार राय की “अबोल ताबोल” प्रकाशित हुई थी। 19 सितंबर 2023 में “अबोल तबोल” का 100 साल पूरा हुआ। जिसका उद्यापन फिर से एकबार हतीबागन नवीनपल्ली में होगा।
डिजिटल युग में बच्चें अपनी ही संस्कृति से ठीक से परिचित नहीं हो पाते है। साहित्य के लिए समय किसी के पास नहीं हैं। इसलिए नवीनपल्ली ने इसबार दुर्गा पूजा की थीम साहित्य से जोड़कर बनाया। जिसे बच्चें अपनी संस्कृति से जुड़े रहे।

*कब से पूजा पंडाल ओपन होगी?*
तृतीया से ही पूजा पंडाल दर्शनार्थियों के लिए खोल दी जाएगी। ऑडियो विजुअल मध्यम से पलक झपकते ही आप पोहच जायेंगे कवि सुकुमार रॉय की दुनिया में जहां सब कुछ “अबोल तबोल” यानी उल्टा पुल्टा हैं। प्रेस क्लब में आयोजित इस कार्यकम में चीफ ऑर्गेनाइजर दीप्त घोष, समाज सेविका झूमा घोष, चीफ एडवाइजर प्रियदर्शिनी घोष बावा, कलाकार अनिर्वाण दास, आलोक सज्जा में हैं प्रेमेंदु विकाश चाकी और वाइस प्रेसिडेंट राजदीप बोस सहित कई गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं।

 

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