कोलकाता – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।
उत्तर कोलकाता के आलमबाजार में स्थित श्री श्याम मंदिर आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। भक्तों के बीच यह मंदिर “कोलकाता का खाटूधाम” के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर की भव्यता जितनी आकर्षक है, उतनी ही महत्वपूर्ण इसके निर्माण की कहानी भी है।
मंदिर निर्माण की यात्रा वर्ष 2008 में भूमि उपलब्ध होने और संस्था की देखरेख में आने के बाद आगे बढ़ी। भूमि से संबंधित जटिलताओं और विवादों के बावजूद मंदिर निर्माण का संकल्प जारी रहा। लगभग 18 महीने तक चली प्रक्रिया के बाद इस पवित्र धाम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई।
●16 मई 2010 को हुआ भूमि पूजन
भूमि संबंधी प्रक्रिया के बाद 16 मई 2010 को शुभ अवसर पर मंदिर के लिए भव्य भूमि पूजन किया गया। धार्मिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में संतों, आध्यात्मिक विभूतियों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। भूमि पूजन के साथ ही मंदिर निर्माण के सपने को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया।
●2013 में शुरू हुआ मंदिर का निर्माण
इसके बाद वर्ष 2013 में मंदिर के वास्तविक निर्माण कार्य का श्रीगणेश हुआ। राजस्थान से आए कुशल कारीगरों ने पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य कला और आकर्षक नक्काशी के जरिए मंदिर को भव्य स्वरूप दिया। मंदिर के निर्माण में मकराना संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है, जबकि गर्भगृह की सजावट में चांदी की बारीक नक्काशी विशेष आकर्षण का केंद्र है।
●2020 में हुई बाबा श्याम की प्राण-प्रतिष्ठा
मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद 30 जनवरी 2020 से 2 फरवरी 2020 तक वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान और भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी दौरान प्रथम तल पर स्थित भव्य गर्भगृह में बाबा श्याम के दिव्य विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
●सुबह की मंगल आरती से रात की शयन आरती तक भक्तिमय माहौल
मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूजा और आरती का निर्धारित समय है। मंदिर सुबह 6 बजे खुलता है। 6:15 बजे मंगल आरती, 9 बजे श्रृंगार आरती और 11:45 बजे भोग आरती होती है। दोपहर 1 बजे विश्राम के बाद मंदिर शाम 4 बजे फिर खुलता है।
शाम 5:30 बजे से श्याम कीर्तन और भजन का आयोजन होता है। इसके बाद 6:15 बजे संध्या आरती और रात 8:45 बजे शयन आरती होती है। रात 10 बजे मंदिर के पट बंद होते हैं।
●एकादशी पर विशेष कीर्तन, उमड़ते हैं श्रद्धालु
हर शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी का मंदिर में विशेष महत्व है। एकादशी की शाम 5:30 बजे से श्याम कीर्तन और भजन संध्या आयोजित की जाती है। इस दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं।
●धार्मिक आयोजनों के साथ समाजसेवा भी
श्री श्याम मंदिर केवल पूजा और दर्शन का केंद्र ही नहीं, बल्कि सेवा कार्यों से भी जुड़ा हुआ है। उपलब्ध विवरण के अनुसार मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, बैठने और दर्शन की व्यवस्था का ध्यान रखा जाता है। समय-समय पर भंडारा, रक्तदान शिविर, कंबल वितरण, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और जरूरतमंदों की सहायता जैसे सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
●पर्व-त्योहारों पर विशेष आयोजन
जन्माष्टमी सहित विभिन्न धार्मिक पर्वों पर मंदिर में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है। इन अवसरों पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
आज श्री श्याम मंदिर आलमबाजार आस्था, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक शांति का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 2008 में शुरू हुई भूमि से जुड़ी यात्रा से लेकर 2010 के भूमि पूजन, 2013 के निर्माण और 2020 की प्राण-प्रतिष्ठा तक मंदिर ने एक लंबा सफर तय किया है। यही सफर आज इसे कोलकाता के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष पहचान दिलाता है।
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