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देश का संसद प्रायोजित षड्यंत्र का शिकार

डाॅ माया शंकर झा ‘राष्ट्रभाषा-रत्न’
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत भारती समाज

 

 

आखिर यह कैसी चिंता है कि चर्चा करने के बजाए नारेबाजी पर जोर दिया जा रहा है। विपक्ष हंगामा करने और संसद न चलने देने के लिए नित नए बहाने खोजने में लगे हुए है। विपक्षी दलों के इस प्रकार के विचित्र व्यवहार को देखते हुए देश की जनता क्षुब्ध है।

हैरानी की बात है कि विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की ओर से पेश किया गया ‘अविश्वास प्रस्ताव’ को लोकसभा में अनुमति मिल जाने के बाद भी सदन को नहीं चलने देना विपक्ष की हठधर्मिता की पराकाष्ठा है। उसके अड़ियल और गैरजिम्मेदाराना रवैये से यह साफ है कि वह न तो मणिपुर को लेकर गंभीर है और न ही संसदीय कामकाज में उसकी कोई दिलचस्पी है। इसीलिए उसने संसद में हंगामा करने के लिए इस बहाने की आड़ ली कि मणिपुर पर चर्चा तभी होने दी जाएगी जब प्रधानमंत्री बोलेंगे। यह विपक्ष की हठधर्मिता नहीं तो क्या है ?

दिखावे के लिए विपक्ष मणिपुर के साथ देश की अन्य समस्याओं की चिंता में दुबले हुए जा रहे हैं। लेकिन सच यह है कि वे इन मामलों मे गंभीर नहीं हैं। उनका अतार्किक रवैया बता रहा है कि उनका उद्देश्य मणिपुर की हिंसा पर चर्चा करना नहीं है। उनका उद्देश्य संसद को अवरुद्ध कर आने वाले सभी 31 बिल को पास होने से रोकना है। उनकी हठधर्मिता का प्रमाण उनके नारे लिखी तख्तियाँ और संसद में काले कपड़ों में दिखना काफी है। काले कपड़े एवं झंडे विरोध का प्रतीक माने जाते हैं और विपक्षी नेताओं को ऐसे प्रतीक अपनाने के पीछे यही आशय है। अब प्रश्न उठता है कि आखिर जनप्रतिनिधि के रूप में संसद में उनका काम अपने काले कपड़ों की नुमाइश करना है या फिर उन विषयों पर बहस करना जिन्हें लेकर वे अपनी चिंता जताने में लगे हुए हैं ?

यह हास्यास्पद है कि विपक्षी दल एक ओर राष्ट्रीय हितों की रक्षा की दुहाई दे रहे हैं और दूसरी ओर संसद में राष्ट्रीय अथवा आम जनता से जुड़े किसी विषय पर चर्चा भी नहीं होने दे रहे हैं। यदि वे यह मानकर चल रहे हैं कि जनता को यह सब समझ नहीं आ रहा है तो वे नादान हैं। जनता सब देख रही है और समझ भी रही है कि कौन संसद न चलने देने पर आमादा है ? यदि विपक्ष अपने गठबंधन को ‘INDIA’ नाम देकर यह मान बैठे हैं कि वे भारत का पर्याय बन गए हैं तो इसे मुगालते के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता। देश की जनता को ऐसे मुगालते को दूर करना अच्छी तरह से आता है।

मैं सभी विपक्षी तेवरों को आगाह करना चाहता हूँ कि वक्त रहते हुए संभल जाओ, अन्यथा न घर के रहोगे न घाट के। मेरी बात गाँठ बाँध लो, तुम अपने ही अविश्वास प्रस्ताव पर बुरी तरह हारोगे और लज्जित होकर संसद से बाहर जाओगे। फिर संसद भी चलेगा और बिल भी पास होगा। तुम खिसियानी बिल्ली की तरह खम्भा नोचना। जनता को विपक्ष पर जो भरोसा था उसे तुम लोग खो चुके हो।

रही बात मोदी सरकार की तो विपक्ष का तेवर और हठधर्मिता ने उसे और अधिक मजबूत बना दिया है। जनता के सामने यह पोल खुल गया कि विपक्ष अपने निजी स्वार्थ के कारण संसद के समय को बर्बाद कर संसद की गरिमामय इतिहास को कलंकित कर रहा है। वक्त किसी को नहीं छोड़ता, सबको सजा देता है। जनता के टेक्स के पैसों को इस प्रकार बर्बाद करना क्या उचित है ?

जब सरकार चर्चा करने के लिए तैयार है तो चर्चा करो, चर्चा और बातचीत से ही सभी समस्याओं का हल निकलेगा। सिर्फ नारेबाजी और शोरगुल करने से समाधान नहीं होगा। बच्चों की तरह चाँद लेने का जिद्द छोड़कर वास्तविकता को समझो और व्यवहारिक बनकर जनता के सामने आओ। तब जनता अवश्य स्वीकार करेगी। सिर्फ लॉलीपॉप की राजनीति करने से सफलता नहीं मिलेगी।

हे भगवान, देश के विपक्षी नेतृत्व को सद्बुद्धि देकर देश के करुणक्रंदन परिस्थितिजन्य वातावरण को सम्हाल ले !
देश के प्रधानमंत्री को वह शक्ति दे जिससे वह देश में अमन-चैन ला सके !

जय हिन्द !
जय भारत !!

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