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हिलसा संरक्षण में नई दिशा दिखा रही हैं मालदह जिला प्रशासन

–संघमित्रा सक्सेना, कोलकाता – पश्चिम बंगाल।

मालदह जिला प्रशासन हिलसा संरक्षण संदेश दे रही हैं। इस संदर्भ में कालिया चौक – III, विकासखंड में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजन किया गया।

●हिलसा संरक्षण क्या है?

•फरक्का बैराज के निकट बह रही गंगा नदी की महत्व समझाना

•मच्छी पालन और प्रजनन के दौरान हिलसा मछली की सुरक्षा पर जोर देना।

•नदी के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखना।

•वास्तु तंत्र में नदी तथा जलज प्राणियों की सुरक्षा हेतु जागरूक पोस्टर तथा हैंड बिल मछुआरे एवं नदी तटवर्ती निवासियों के बीच वितरित किया गया है।

●कैसे होता है हिलसा संरक्षण?

•प्रजनन काल में प्रतिबंध: मानसून और अक्टूबर-नवंबर के मुख्य प्रजनन महीनों के दौरान माँ हिलसा और छोटी हिलसा (झटका) के शिकार पर रोक।

•नदियों में अभयारण्य मैंडेटरी: हुगली-भागीरथी और अन्य प्रमुख नदी प्रणालियों में हिलसा के प्रजनन स्थलों को सुरक्षित क्षेत्र घोषित करना।

•जाल के आकार पर नियम बहुत जरूरी है। छोटी व नासमझ मछलियों को बचाने के लिए तय आकार से छोटे जालों के प्रयोग पर पाबंदी।

•जरूरतमंद मछुआरों को सहायता करना। प्रतिबंध के दिनों में प्रभावित गरीब मछुआरा परिवारों को वैकल्पिक आजीविका और खाद्य सहायता देना।

मालदह जिला प्रशासन ने सभी मत्स्यजीवी तथा स्थानीय लोगों से गंगा के अमूल्य रुपाली फसल यानी हिलसा प्रजाति की सुरक्षा की अपील की हैं।

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