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गंगा में जान जोखिम में डालकर किशोरों की मस्ती, हादसों के बावजूद नहीं थम रहा ‘मौत का छलांग’ खेल

कोलकाता – पश्चिम बंगाल, बात हिन्दुस्तान की।

कोलकाता के गंगा घाटों और फेरी सेवा में इन दिनों कुछ किशोरों की खतरनाक हरकतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। खेल-खेल में मौत को चुनौती देते हुए कई किशोर लंच और फेरी से गंगा में छलांग लगाते नजर आ रहे हैं। इस खतरनाक खेल के दौरान कई बार किशोर डूबने की कगार पर पहुंच जाते हैं और कभी-कभी जान भी चली जाती है।

बांधा घाट से आहिरिटोला जाने वाली फेरी सेवा के दौरान ऐसा ही खतरनाक नजारा देखने को मिलता है। कई किशोर लंच के ऊपर चढ़कर गंगा में छलांग लगाते हैं और इसे मनोरंजन का हिस्सा मानते हैं। हाल ही में आहिरिटोला घाट पर भी एक किशोर लंच से छलांग लगाने के दौरान गंगा में डूबने लगा। संयोग से आसपास कई किशोर तैर रहे थे, जिन्होंने तुरंत उसे बचा लिया।

वहीं, पिछले दिनों बाली थाना क्षेत्र के पाल घाट में स्नान करने के दौरान एक किशोर गंगा में डूब गया। आसपास मौजूद किशोरों ने उसे बचाने की कोशिश की और पानी से बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गंगा में स्नान और खतरनाक तरीके से छलांग लगाने के कारण हर साल कई हादसे सामने आते हैं। अनुमान के मुताबिक, इस तरह की घटनाओं की संख्या सालाना 15 से 20 या उससे भी अधिक हो सकती है।

घाटों पर प्रशासन की ओर से हेल्पलाइन नंबरों वाले पोस्टर लगाए गए हैं। वहीं, बांधा घाट पर लोगों को सुरक्षित सीमा के भीतर स्नान करने के लिए पुलिस की ओर से घोषणा भी की जा रही है। गंगा में प्लास्टिक की गेंदों के सहारे एक सीमा भी बनाई गई है, ताकि लोग उस सीमा को पार करके गहरे पानी में न जाएं।

लेकिन आरोप है कि रोमांच और मस्ती के नाम पर कुछ किशोर इस सुरक्षा सीमा को भी नजरअंदाज कर देते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि फेरी में किनारे बैठी महिलाओं को निशाना बनाकर भी ये किशोर गंगा में छलांग लगाते हैं। छलांग लगाने के बाद पानी के छींटे महिलाओं पर पड़ते हैं, जिससे उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार हादसों और मौतों के बावजूद इस खतरनाक ‘मौत की छलांग’ पर पूरी तरह रोक कब लगेगी? क्या सिर्फ चेतावनी और हेल्पलाइन नंबरों के पोस्टर पर्याप्त हैं, या फिर घाटों और फेरी सेवाओं पर निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है?

बांधा घाट और आहिरिटोला फेरी सेवा में दिखाई देने वाला यह नजारा मनोरंजन नहीं, बल्कि किसी बड़े हादसे का संकेत है। एक छोटी सी गलती किसी परिवार से उसका बच्चा छीन सकती है।

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